महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित जागोली धर्मशाला इन दोनों महान नेताओं से जुड़ी स्वतंत्रता आंदोलन की यादों को आज भी संजोए हुए है। खेतीखान के गोशनी गांव में स्थित यह ऐतिहासिक धर्मशाला कभी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए गुप्त ठिकाने के रूप में इस्तेमाल होती थी।
अंग्रेजों से बचने के लिए शास्त्री ने बनाया था ठिकाना
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वर्ष 1934 में लाल बहादुर शास्त्री ने अंग्रेजी हुकूमत से बचने के लिए जागोली धर्मशाला में करीब एक सप्ताह बिताया था। इसी दौरान उन्होंने आजादी के आंदोलन से जुड़ी रणनीति पर काम किया। उस दौर में यह स्थान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सुरक्षित और अपेक्षाकृत गुप्त ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
कई स्वतंत्रता सेनानियों की शरणस्थली रही धर्मशाला
जागोली धर्मशाला सिर्फ शास्त्री जी से ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई अन्य सेनानियों की यादों से भी जुड़ी है। ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान यहां कई स्वतंत्रता सेनानियों ने शरण ली थी। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के लिए यह स्थान आज भी ऐतिहासिक महत्व रखता है।
गांधी-शास्त्री जयंती पर होती है प्रभातफेरी
जागोली धर्मशाला में गांधी और शास्त्री जयंती मनाने की अपनी अलग परंपरा है। हर साल 2 अक्टूबर को यहां प्रभातफेरी निकाली जाती है और धर्मशाला में खीर का भोग लगाया जाता है। बाद में खीर का प्रसाद लोगों को वितरित किया जाता है।
1952 में पहली बार निकली थी प्रभातफेरी
जागोली धर्मशाला से जुड़ी प्रभातफेरी की परंपरा भी कई दशक पुरानी है। बताया जाता है कि 26 जनवरी 1952 को संविधान लागू होने Fकी खुशी में यहां पहली बार प्रभातफेरी निकाली गई थी। इसका नेतृत्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दुर्गादत्त ओली ने किया था।
आसपास के गांवों के युवाओं ने लिया था हिस्सा
पहली प्रभातफेरी में गोशनी गांव के साथ आसपास के गांवों के युवाओं ने भी हिस्सा लिया था। इतिहासकार देवेंद्र ओली के अनुसार, खेतीखान से जागोली धर्मशाला तक निकाली गई इस प्रभातफेरी में सुखदेव ओली, गोपाल दत्त, जोगा राम ओली, बाला दत्त ओली, रूपदेव ओली, दुर्गा दत्त कर्नाटक और गिरधारी लाल वर्मा समेत कई युवा शामिल हुए थे।
हर ऐतिहासिक दिवस पर जारी रही प्रभातफेरी की परंपरा
पहली प्रभातफेरी के बाद जागोली धर्मशाला और गोशनी गांव में राष्ट्रीय और ऐतिहासिक अवसरों पर प्रभातफेरी निकालने की परंपरा आगे भी जारी रही। स्थानीय स्तर पर यह परंपरा आज भी निभाई जा रही है और नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास की जानकारी देने का माध्यम बनी हुई है।
2 अक्टूबर को लगता है खीर का भंडारा
गांधी और शास्त्री जयंती के मौके पर जागोली धर्मशाला में हर साल खीर का भोग लगाया जाता है। जागोली मंदिर और धर्मशाला समिति की ओर से खीर का भंडारा आयोजित किया जाता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी इस ऐतिहासिक स्थल की पहचान का हिस्सा बनी हुई है।


