भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के निर्देशानुसार आयोजित किए जा रहे “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के तहत जनपद Pauri Garhwal के यमकेश्वर स्थित Parmarth Niketan में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में तीर्थ यात्रियों, वेदाचार्यों और श्रद्धालुओं ने गुजरात के Somnath Temple से प्रधानमंत्री Narendra Modi के संबोधन का सजीव प्रसारण देखा और सुना.
सोमनाथ भारत की सनातन चेतना का प्रतीक : चिदानंद सरस्वती
परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष Chidanand Saraswati ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं बल्कि भारत की सनातन चेतना का प्रतीक है.
उन्होंने कहा कि आस्था, संस्कृति और अध्यात्म की शक्ति ही भारत की वास्तविक पहचान है. ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक जागरूकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं.
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ते हैं ऐसे आयोजन
उपजिलाधिकारी Chatar Singh Chauhan ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव का जीवंत प्रतीक है.
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम नई पीढ़ी को देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं. साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया.
संघर्ष और पुनर्निर्माण का प्रतीक है सोमनाथ मंदिर
कार्यक्रम में बताया गया कि सोमनाथ मंदिर की लगभग 1000 वर्षों की संघर्षपूर्ण और गौरवशाली यात्रा भारतीय संस्कृति, आस्था और आत्मगौरव का प्रतीक मानी जाती है.
इतिहास में कई विदेशी आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण भारतीय सभ्यता की अदम्य शक्ति और सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है.
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य इसी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है.
गंगा आरती और दीपोत्सव का हुआ आयोजन
कार्यक्रम के अंतर्गत संध्या के समय परमार्थ आश्रम में भव्य गंगा आरती और दीपोत्सव का आयोजन भी किया गया.
इस अवसर पर शिव स्त्रोत के सामूहिक गायन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों ने भाग लिया.
कार्यक्रम में संस्कृति विभाग से अनिल बिष्ट, प्रेमानंद ध्यानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, वेदाचार्य और तीर्थ यात्री उपस्थित रहे.


