Supreme Court of India ने Election Commission of India के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट की नियुक्ति करना चुनाव आयोग का अधिकार है।
इस फैसले से All India Trinamool Congress और Mamata Banerjee को बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने मांग की थी कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी काउंटिंग सुपरवाइजर बनाया जाए।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि चुनाव ड्यूटी के दौरान सभी कर्मचारी चुनाव आयोग के नियंत्रण में होते हैं, इसलिए यह मायने नहीं रखता कि वे केंद्र से हैं या राज्य से। इस आधार पर सर्कुलर को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
टीएमसी की दलील
टीएमसी की ओर से पेश हुए Kapil Sibal ने तर्क दिया कि केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है और इससे ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ पर असर पड़ेगा।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि 13 अप्रैल के सर्कुलर के तहत काउंटिंग टेबल पर संतुलन बनाए रखने के लिए एक कर्मचारी केंद्र से और एक राज्य से रखा जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा कि सर्कुलर को पूरी तरह लागू किया जाएगा और किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है।


