उत्तराखंड में अवैध कॉलोनियों और प्रॉपर्टी डीलरों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। राज्य में ‘सुरक्षा कवच’ के तहत अवैध प्लॉटिंग करने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित जमीनों के खसरा नंबर को ही फ्रीज किया जाएगा, ताकि दोबारा वहां अवैध निर्माण या बिक्री न हो सके।
अवैध प्लॉटिंग पर सख्त एक्शन
उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने इसके लिए विस्तृत योजना तैयार कर ली है। अब केवल अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन जमीनों की पहचान कर उनके खसरा नंबर को भी स्थायी रूप से ब्लॉक किया जाएगा। इससे प्रॉपर्टी डीलर दोबारा उसी जमीन पर अवैध प्लॉटिंग नहीं कर पाएंगे।
विभागों के बीच बनेगा समन्वय तंत्र
नई व्यवस्था के तहत विकास प्राधिकरण, जिलाधिकारी, निबंधक और उप-निबंधक कार्यालयों को निर्देश दिए जाएंगे कि ध्वस्त की गई अवैध कॉलोनियों का पूरा डाटा रेरा को सौंपा जाए। इसके लिए विभागों के बीच एक विशेष समन्वय प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे कार्रवाई में पारदर्शिता और तेजी लाई जा सके।
‘लूपहोल’ बंद करने की तैयारी
अब तक यह देखा गया है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के कुछ समय बाद ही प्रॉपर्टी डीलर दोबारा उसी जमीन पर निर्माण शुरू कर देते थे। खसरा नंबर फ्रीज करने की नई व्यवस्था इस खामी को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
आम खरीदारों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को होगा। अक्सर कम कीमत के लालच में लोग अवैध कॉलोनियों में निवेश कर देते हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं और कानूनी मंजूरी नहीं होती। नई व्यवस्था लागू होने के बाद खरीदारों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि जमीन या प्रोजेक्ट रेरा से पंजीकृत है या नहीं, जिससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।
ग्रामीण इलाकों में भी सख्त निगरानी
रेरा अब केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में भी अवैध प्लॉटिंग पर सीधी नजर रखेगा। यदि कहीं बिना अनुमति कॉलोनी विकसित की जाती है, तो वहां भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से राज्य में अनियोजित विकास पर रोक लगेगी और लोगों का निवेश सुरक्षित होगा।


