शनिवार सुबह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. सुबह करीब 5:02 बजे आए इस भूकंप ने लोगों को अचानक नींद से जगा दिया. झटके महसूस होते ही कई लोग डर के कारण अपने घरों से बाहर निकल आए.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, रुद्रप्रयाग में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.06 मापी गई. भूकंप का केंद्र रुद्रप्रयाग से लगभग 10 किलोमीटर पूर्व में स्थित था और इसकी गहराई धरती से करीब 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई. झटकों की अवधि लगभग 10 से 15 सेकंड तक रही.
उत्तरकाशी में भी महसूस हुए झटके
रुद्रप्रयाग में आए भूकंप का असर उत्तरकाशी जिले में भी देखने को मिला. यहां सुबह करीब 5:13 बजे हल्के झटके महसूस किए गए. हालांकि इन झटकों की तीव्रता कम थी, लेकिन लोगों में कुछ समय के लिए दहशत फैल गई.
कई स्थानों पर लोग घरों से बाहर निकल आए और स्थिति को लेकर सतर्क नजर आए. जिला आपदा परिचालन केंद्र के मुताबिक, उत्तरकाशी में महसूस किए गए झटकों का केंद्र भी रुद्रप्रयाग ही था.
नुकसान की कोई खबर नहीं
प्रशासन ने राहत की खबर देते हुए बताया कि अब तक कहीं से भी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है. झटके हल्के होने के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका नहीं बनी. हालांकि कुछ समय तक लोगों में अफरा-तफरी का माहौल जरूर रहा, जो बाद में सामान्य हो गया.
गौरतलब है कि उत्तरकाशी भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील जोन में आता है. यही वजह है कि यहां हल्के झटकों पर भी लोग ज्यादा सतर्क हो जाते हैं. प्रशासन भी ऐसे मामलों में तुरंत अलर्ट मोड पर आ जाता है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके.
क्यों आता है भूकंप
भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल के कारण आता है. पृथ्वी के अंदर कई प्लेट्स लगातार गतिशील रहती हैं. जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या उनके बीच दबाव बढ़ता है, तो ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है. इसी प्रक्रिया से भूकंप आता है.
जहां प्लेट्स टकराती हैं, उस क्षेत्र को फॉल्ट लाइन कहा जाता है. लंबे समय तक दबाव बनने के बाद प्लेट्स के खिसकने या टूटने से धरती हिलती है.
भूकंप का केंद्र, जिसे एपीसेंटर कहा जाता है, वह स्थान होता है जहां से कंपन सबसे ज्यादा महसूस किया जाता है. जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, झटकों की तीव्रता कम होती जाती है.
अगर भूकंप की तीव्रता 7 या उससे अधिक हो, तो इसका असर बड़े क्षेत्र में महसूस किया जाता है. हालांकि इसका प्रभाव जमीन की संरचना और ऊर्जा की दिशा पर भी निर्भर करता है.
कैसे मापी जाती है तीव्रता
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है. इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल भी कहा जाता है. इस स्केल पर भूकंप की तीव्रता 1 से 9 तक मापी जाती है.
इस पैमाने से यह पता लगाया जाता है कि भूकंप के दौरान कितनी ऊर्जा निकली और उसका असर कितना व्यापक हो सकता है. तीव्रता जितनी ज्यादा होगी, नुकसान की संभावना भी उतनी ही अधिक होती है.

