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सार्वजनिक जमीन पर नमाज पढ़ना अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

Mintwire by Mintwire
03/05/2026
in देश
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प्रयागराज:Allahabad High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सार्वजनिक जमीन पर नमाज पढ़ना मौलिक अधिकार के दायरे में नहीं आता। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण नहीं है और यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और अन्य लोगों के अधिकारों के अधीन है।


यह टिप्पणी संभल जिले के इकोना गांव में सार्वजनिक भूमि पर नमाज अदा करने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज करते हुए की गई। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि जमीन उसकी निजी संपत्ति है और उसे वहां नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है।

सरकार का पक्ष: जमीन ‘आबादी’ श्रेणी में दर्ज


Uttar Pradesh सरकार ने अदालत में दलील दी कि संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में “आबादी भूमि” के रूप में दर्ज है, जो सार्वजनिक उपयोग के लिए होती है। साथ ही याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत गिफ्ट डीड में जमीन की स्पष्ट पहचान नहीं थी, जिससे उसके स्वामित्व पर संदेह बना रहा।

धार्मिक स्वतंत्रता पर अदालत की स्पष्ट टिप्पणी


अदालत ने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता जरूर देता है, लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों का उपयोग इस तरह नहीं किया जा सकता जिससे आम लोगों की आवाजाही, व्यवस्था या सामाजिक संतुलन प्रभावित हो।

निजी पूजा और सार्वजनिक आयोजन में अंतर


कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी स्थान पर व्यक्तिगत रूप से पूजा करना पूरी तरह संरक्षित है, लेकिन जब यह गतिविधि बड़े समूह के साथ सार्वजनिक स्वरूप ले लेती है, तो सरकार उसे नियंत्रित कर सकती है।

एहतियाती कार्रवाई का अधिकार प्रशासन को


अदालत ने कहा कि प्रशासन को किसी घटना के होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। यदि किसी गतिविधि से सार्वजनिक व्यवस्था या साम्प्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है, तो पहले से ही रोकथाम के कदम उठाए जा सकते हैं।

Tags: allahabad courtnamaz news
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