परीक्षा रद्द होने से छात्रों में तनाव और चिंता, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी अहम सलाह
देशभर के लाखों मेडिकल छात्रों के लिए NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने की खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं रही. परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में तनाव, निराशा और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित हुई NEET UG 2026 परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया. यह फैसला राजस्थान में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद लिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच एजेंसियों को पता चला कि एक कथित ‘गेस पेपर’ असली परीक्षा के 100 से ज्यादा सवालों से मेल खाता था. यह पेपर कथित तौर पर टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए लाखों रुपये में बेचा गया था.
परीक्षा रद्द होने की घोषणा के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर छात्रों की भावुक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कई छात्रों ने महीनों नहीं बल्कि सालों तक इस परीक्षा की तैयारी की थी. खासतौर पर ड्रॉप लेकर तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह खबर बेहद निराशाजनक साबित हुई.
छात्रों पर पड़ा मानसिक दबाव
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं छात्रों की भावनात्मक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती हैं. कई छात्र ऐसी परिस्थितियों को अपनी व्यक्तिगत असफलता मानने लगते हैं, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं होती.
प्रसिद्ध मनोचिकित्सक Dr Samir Parikh ने कहा कि छात्रों को समझना चाहिए कि यह किसी एक छात्र की विफलता नहीं है.
उन्होंने कहा, “हर छात्र को यह समझने की जरूरत है कि यह सिर्फ उसके साथ नहीं हुआ है. यह किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि पूरे सिस्टम से जुड़ी स्थिति है.
निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लिया गया फैसला
डॉ. समीर पारिख के अनुसार परीक्षा रद्द करने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे.
उन्होंने कहा, “छात्र ऐसी परीक्षा देना चाहेंगे जहां उन्हें भरोसा हो कि सबकुछ निष्पक्ष तरीके से हुआ है और सफलता उनकी मेहनत और योग्यता के आधार पर मिलेगी.”
उन्होंने आगे कहा कि बाद में छात्र यह महसूस नहीं करना चाहेंगे कि उनकी मेहनत किसी गलत तरीके या पेपर लीक की वजह से बेकार हो गई.
‘अपनी मेहनत और क्षमता पर भरोसा रखें’
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने छात्रों से अपनी तैयारी और मेहनत पर भरोसा बनाए रखने की अपील की है.
डॉ. पारिख ने कहा, “अगर आपने मेहनत की है, अच्छी तैयारी की है और पहले परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकते थे, तो इसका मतलब है कि आप दोबारा भी अच्छा कर सकते हैं. अपनी क्षमता पर विश्वास रखें.”
विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे बड़ा असर छात्रों के आत्मविश्वास पर पड़ता है. कई छात्र यह सोचकर घबराने लगते हैं कि क्या वे दोबारा उसी फोकस और ऊर्जा के साथ तैयारी कर पाएंगे.
यह दबाव उन छात्रों के लिए और अधिक बढ़ जाता है जो पहले से ही लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं और मानसिक थकान महसूस कर रहे हैं.
सोशल मीडिया और अफवाहों से दूर रहने की सलाह
विशेषज्ञों ने छात्रों को लगातार सोशल मीडिया देखने, अफवाहों पर ध्यान देने और डर फैलाने वाली चर्चाओं से बचने की सलाह दी है.
उनका कहना है कि इससे तनाव और चिंता बढ़ सकती है. इसके बजाय छात्रों को अपनी दिनचर्या सामान्य रखने, पर्याप्त नींद लेने, शांत मन से पढ़ाई करने और बीच-बीच में आराम करने की जरूरत है.
छात्रों के लिए माता-पिता की भूमिका बेहद अहम
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. छात्र अक्सर अपने परिवार की भावनाओं से प्रभावित होते हैं.
अगर माता-पिता लगातार चिंता जताते हैं, समय और पैसे की बात करते हैं या भविष्य को लेकर डर व्यक्त करते हैं, तो इससे छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
डॉ. समीर पारिख ने कहा, “माता-पिता को अपने बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए और उन्हें यह भरोसा दिलाना चाहिए कि वे उन पर विश्वास करते हैं. यह ऐसी स्थिति है जो किसी के नियंत्रण में नहीं थी.”
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां students को जिंदगी का एक बड़ा सबक भी सिखाती हैं कि कौन-सी चीजें हमारे नियंत्रण में हैं और कौन-सी नहीं.
कब लेनी चाहिए विशेषज्ञ की मदद?
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद कुछ समय तक तनाव महसूस करना सामान्य बात है. लेकिन अगर किसी छात्र को लगातार घबराहट, बार-बार रोना, नींद न आना, भूख में बदलाव, निराशा या बहुत ज्यादा चिंता महसूस हो रही है, तो तुरंत मदद लेनी चाहिए.
डॉ. पारिख ने कहा, “जो छात्र दबाव को संभाल नहीं पा रहे हैं, उन्हें परिवार, दोस्तों या किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए.”
नई परीक्षा तारीखों का इंतजार
अब students और अभिभावकों की नजरें NTA द्वारा जारी होने वाली नई परीक्षा तारीखों पर टिकी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान छात्रों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि भावनात्मक समर्थन, सकारात्मक माहौल और मानसिक स्थिरता की भी उतनी ही जरूरत है.


