दिवंगत माफिया और राजनेता अतीक अहमद के बड़े बेटे मोहम्मद अहजम का नाम उसके भाई अबान की मौत के बाद एक बार फिर चर्चा में है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि उसके खिलाफ आज तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई. इसके पीछे की वजह जांच में सबूतों की कमी और उस समय उसकी नाबालिग उम्र बताई जा रही है.
कौन हैं मोहम्मद अहजम?
मोहम्मद अहजम माफिया-राजनेता अतीक अहमद का बेटा है. फरवरी 2023 में उमेश पाल हत्याकांड के बाद पुलिस ने उसे उसके छोटे भाई अबान अहमद के साथ हिरासत में लिया था. उस समय दोनों नाबालिग थे, इसलिए उन्हें किशोर न्याय अधिनियम के तहत बाल सुधार गृह भेजा गया.
क्यों नहीं दर्ज हुई कोई FIR?
जांच एजेंसियों के अनुसार उमेश पाल हत्याकांड या किसी अन्य आपराधिक मामले में मोहम्मद अहजम की प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई ठोस सबूत नहीं मिला. इसी वजह से उसके खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई. पुलिस ने पूछताछ जरूर की, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण उसे आरोपी नहीं बनाया गया.
किशोर न्याय कानून का मिला संरक्षण
अहजम नाबालिग था, इसलिए उसके मामले में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रावधान लागू हुए. कानून के तहत नाबालिगों के साथ पूछताछ और कार्रवाई अलग प्रक्रिया के तहत की जाती है. हालांकि यह संरक्षण केवल प्रक्रिया से जुड़ा होता है. यदि किसी नाबालिग के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
क्या अब भी कानूनी संरक्षण मिलेगा?
सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अहजम को आगे भी कानूनी संरक्षण मिलेगा. इसका जवाब उसकी वर्तमान उम्र और किसी नए मामले में उपलब्ध सबूतों पर निर्भर करेगा. यदि किसी नए अपराध में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं और वह बालिग है, तो उस पर सामान्य कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
प्रयागराज से झांसी जाते समय हादसे में हुई मौत
माफिया-राजनेता अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की उत्तर प्रदेश के झांसी में सड़क हादसे में मौत हो गई. वह अपने दोस्त सोनू के साथ कार से प्रयागराज से झांसी जा रहा था. तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकरा गई, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस शुरुआती जांच में तेज रफ्तार को हादसे की वजह मान रही है.
उमेश पाल हत्याकांड के बाद हिरासत में आया था नाम
फरवरी 2023 में उमेश पाल हत्याकांड के बाद अबान अहमद और उसके बड़े भाई मोहम्मद अहजम को पुलिस ने हिरासत में लिया था. उस समय दोनों नाबालिग थे, इसलिए उन्हें पूछताछ के बाद किशोर न्याय कानून के तहत प्रयागराज के राजरूपपुर बाल सुधार गृह भेजा गया. बाद में कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया.


