आजकल ई-सिगरेट और फ्लेवर्ड हुक्का युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं. हालांकि, विशेषज्ञ लंबे समय से इनके इस्तेमाल को सेहत के लिए नुकसानदायक बताते रहे हैं. ई-सिगरेट और हुक्के के धुएं में मौजूद निकोटीन और अन्य पदार्थ फेफड़ों समेत शरीर के कई हिस्सों पर बुरा असर डाल सकते हैं.
इसी बीच बाबा रामदेव का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह एक तरह के ‘आयुर्वेदिक हुक्के’ के बारे में बताते नजर आ रहे हैं. उनके मुताबिक, इसमें कुछ आयुर्वेदिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इसे किसी बीमारी के इलाज के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
आयुर्वेदिक हुक्का बनाने के लिए क्या चाहिए?
बाबा रामदेव के बताए तरीके के मुताबिक, इसे तैयार करने के लिए मुलेठी, हल्दी, राई, गाय का घी, काकड़ा सिंगी और देसी कपूर जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है.
कैसे तैयार किया जाता है?
वीडियो में बाबा रामदेव बताते हैं कि सबसे पहले मुलेठी को थोड़ा कूटकर उसमें गाय का घी मिलाया जाता है. इसके बाद इसमें एक चुटकी हल्दी और राई डालने की बात कही गई है.
इसके बाद हुक्के की प्लेट पर देसी कपूर रखकर उसे जलाया जाता है और उसके ऊपर काकड़ा सिंगी डालने की बात कही गई है.
बंद नाक और खांसी को लेकर क्या दावा किया गया?
बाबा रामदेव के मुताबिक, इन चीजों को हुक्के के जरिए लेने से बंद नाक खोलने और खांसी जैसी परेशानियों में राहत मिल सकती है. उन्होंने इसे वात, पित्त और कफ यानी त्रिदोष से जुड़ी समस्याओं में भी राहत देने वाला बताया है.
हालांकि, किसी भी तरह के धुएं को सांस के जरिए लेना पूरी तरह सुरक्षित है, ऐसा मानना सही नहीं है. खासकर सांस से जुड़ी बीमारी या एलर्जी वाले लोगों को इस तरह के प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
ई-सिगरेट और फ्लेवर्ड हुक्के से बचने की सलाह
बाबा रामदेव ने ई-सिगरेट और फ्लेवर्ड हुक्के में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू और अलग-अलग रसायनों को सेहत के लिए नुकसानदायक बताया है. उन्होंने लोगों को इनका इस्तेमाल न करने की सलाह दी.
गौरतलब है कि हुक्का या ई-सिगरेट को सिर्फ ‘फ्लेवर्ड’ या ‘हर्बल’ होने की वजह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता. धुएं या एरोसोल का सेवन फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है.


