मोबाइल फोन के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. 1 अप्रैल 2027 से भारत में बिकने या आयात होने वाले सभी ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का प्रमाणन अनिवार्य होगा. इसका मकसद बाजार में बिकने
वाले घटिया और कम गुणवत्ता वाले स्क्रीन गार्ड पर लगाम लगाना है.
मानक का करना होगा पालन
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की 21 सितंबर 2026 की अधिसूचना के मुताबिक, ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य पंजीकरण आदेश में प्रविष्टि 66 के तहत शामिल किया गया है. अब इन उत्पादों को IS 19348:2025 के तय मानकों के अनुरूप होना पड़ेगा. बिना जरूरी प्रमाणन के ऐसे उत्पादों की बिक्री और आयात पर रोक होगी.
टूटने और झटके से बचाव की होगी जांच
नए मानकों के तहत स्क्रीन प्रोटेक्टर की मजबूती और प्रभाव सहने की क्षमता की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी. इसमें सतह के दबाव की क्षमता कम से कम 500 MPa और झुकने की मजबूती 200 MPa निर्धारित की गई है. इससे केवल ‘11D’ या ‘100D’ जैसे प्रचारात्मक दावों के बजाय उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता को परखा जा सकेगा.
टूटने पर नुकीले टुकड़ों का खतरा होगा कम
मानकों में टूटने के बाद कांच के टुकड़ों की सुरक्षा को भी शामिल किया गया है. स्क्रीन प्रोटेक्टर के टूटने पर कांच के नुकीले टुकड़ों में बिखरने के बजाय अपेक्षाकृत सुरक्षित छोटे टुकड़ों में बदलने और चिपकने वाली परत से जुड़े रहने की आवश्यकता होगी. इससे उपयोगकर्ताओं के हाथों में चोट लगने का जोखिम कम किया जा सकेगा.
डिस्प्ले की स्पष्टता और टच पर भी जोर
नए नियमों में स्क्रीन की रोशनी और स्पष्टता से जुड़े मानक भी तय किए गए हैं. सामान्य पारदर्शी ग्लास के लिए कम से कम 89 प्रतिशत प्रकाश पारगम्यता, जबकि प्राइवेसी ग्लास के लिए 59 प्रतिशत का मानक रखा गया है. पिनहोल, हवा के बुलबुले और असमान चिपकने वाली परत जैसे निर्माण दोषों पर भी नियंत्रण रहेगा.
दुकानों और ऑनलाइन बाजार में दिखेगा BIS प्रमाणन
अप्रैल 2027 से नियम लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को स्क्रीन प्रोटेक्टर की पैकेजिंग पर आधिकारिक BIS प्रमाणन चिह्न देखने को मिलेगा. इससे खरीदारों को उत्पाद की गुणवत्ता पहचानने में मदद मिलेगी. बिना प्रमाणन वाले और मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर की बिक्री पर रोक लग जाएगी.


