भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने आखिरकार एशियन गेम्स में अपना पहला पदक जीत लिया है. बुधवार को नागोया में हुए मुकाबले में चानू ने महिलाओं की 49 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. उन्होंने कुल 198 किग्रा वजन उठाया. चानू के इस पदक के साथ ही एशियन गेम्स में भारत का वेटलिफ्टिंग पदक का 28 साल पुराना इंतजार भी खत्म हो गया.
उत्तर कोरिया की री सोंग गम ने 215 किग्रा के कुल वजन के साथ गोल्ड मेडल जीता. वहीं इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रि विजायना ने 191 किग्रा के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. भारत के लिए इससे पहले एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग का पदक कर्णम मल्लेश्वरी ने 1998 में बैंकॉक में जीता था.
तीन कोशिशों के बाद चानू ने रचा इतिहास
मीराबाई चानू के लिए एशियन गेम्स का सफर आसान नहीं रहा है. 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में वह 9वें स्थान पर रही थीं. 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में वह पीठ की चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकीं. वहीं 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में क्लीन एंड जर्क के दौरान चोट लगने के बाद वह चौथे स्थान पर रही थीं.
इस बार चानू ने स्नैच में अपने तीनों प्रयास सफल किए और 87 किग्रा का सर्वश्रेष्ठ वजन उठाया. हालांकि री सोंग गम ने 94 किग्रा उठाकर बढ़त बना ली.
क्लीन एंड जर्क में किया शानदार प्रदर्शन
चानू ने क्लीन एंड जर्क में 107 किग्रा के साथ शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 111 किग्रा सफलतापूर्वक उठाया. इससे उनका कुल स्कोर 198 किग्रा हो गया और सिल्वर मेडल लगभग पक्का हो गया.
दूसरी ओर, री सोंग गम ने 116 किग्रा उठाने के बाद 121 किग्रा का प्रयास किया. उन्होंने इस लिफ्ट के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और कुल 215 किग्रा के साथ गोल्ड जीता.
28 साल बाद एशियन गेम्स में भारत को पदक
मीराबाई चानू का सिल्वर मेडल भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए बेहद खास है. 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के सिल्वर के बाद कोई भारतीय वेटलिफ्टर एशियन गेम्स में पोडियम तक नहीं पहुंच पाया था. चानू ने 28 साल बाद यह सूखा खत्म कर दिया.
चानू के नाम ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक पहले से मौजूद हैं. वह लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीत चुकी हैं. अब एशियन गेम्स का पदक भी उनकी उपलब्धियों की सूची में शामिल हो गया है.

