दिल्ली विश्वविद्यालय का नॉर्थ कैंपस सोमवार को छात्राओं के नारों और पोस्टरों से गूंज उठा। मिरांडा हाउस की अपील के बाद अलग-अलग कॉलेजों की छात्राओं और क्वियर कम्युनिटी के सदस्यों ने ‘हम औरतें आजाद हैं’ मार्च में हिस्सा लिया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्राएं मार्च में शामिल हुईं।
मिरांडा हाउस से विवेकानंद प्रतिमा तक मार्च
मार्च मिरांडा हाउस से शुरू होकर आर्ट्स फैकल्टी और छात्रा मार्ग होते हुए स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा तक पहुंचा। रास्ते भर छात्राएं महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्र आवाजाही और सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने की मांग को लेकर नारे लगाती रहीं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भी तैनाती रही।
‘Cutie नहीं, क्रांति हूं’ जैसे पोस्टरों ने खींचा ध्यान
प्रदर्शन में छात्राओं के हाथों में कई तरह के पोस्टर नजर आए। इनमें ‘रानी बेटी Rebel बनेगी’, ‘Cutie नहीं, क्रांति हूं’, ‘शर्म नहीं, सवाल करूंगी’, ‘हम आजाद हैं सिर्फ पन्नों पर’ और ‘लड़कियां केवल अपने अधिकार चाहती हैं’ जैसे संदेश शामिल थे। महिलाओं की सुरक्षा और समाज में लैंगिक भेदभाव को लेकर भी पोस्टरों के जरिए सवाल उठाए गए।
‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’ के नारे
मार्च के दौरान छात्राओं ने ‘हमें लेकर रहेंगे आजादी’ और ‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही पर पाबंदी लगाने के बजाय सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
कई कॉलेजों की छात्राएं हुईं शामिल
मार्च में मिरांडा हाउस के अलावा इंद्रप्रस्थ कॉलेज, लक्ष्मीबाई कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, श्रद्धानंद कॉलेज, माता सुंदरी कॉलेज समेत दिल्ली विश्वविद्यालय के कई संस्थानों की छात्राएं शामिल हुईं। इससे पहले लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज और कमला नेहरू कॉलेज से जुड़ी छात्राएं भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुकी हैं।
‘लड़कियों को नहीं, लड़कों को सिखाएं’
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने महिलाओं के प्रति व्यवहार और लैंगिक संवेदनशीलता को लेकर भी सवाल उठाए। लक्ष्मीबाई कॉलेज की एक छात्रा ने कहा कि छात्राओं को रोजाना घूरने और असहज करने वाली निगाहों का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शनकारियों ने कानूनी कार्रवाई के साथ लड़कों को कम उम्र से ही सम्मान और सहमति के बारे में शिक्षित करने की मांग रखी।
मॉरल पुलिसिंग और पाबंदियों पर भी सवाल
गार्गी कॉलेज की छात्राओं ने कहा कि कई लड़कियां परिवार की रोक-टोक और सामाजिक दबाव के कारण ऐसे प्रदर्शनों में खुलकर शामिल नहीं हो पातीं। कुछ छात्राएं मास्क लगाकर मार्च में पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनके बाहर निकलने, कपड़ों या समय को नियंत्रित करने के बजाय असुरक्षित माहौल को बदलने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
‘माता-पिता ने मना किया, फिर भी प्रदर्शन में आई’
हंसराज कॉलेज की छात्रा स्पर्शिका ने बताया कि उनके माता-पिता ने सुरक्षा को लेकर उन्हें प्रदर्शन में जाने से मना किया था, लेकिन वह फिर भी मार्च में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि महिलाएं बिना डर के बाहर निकल सकें, इसके लिए सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा पर काम जरूरी है।
‘महिलाओं के कपड़ों और समय पर सवाल क्यों?’
एक अन्य DU छात्रा ने महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के बाद उनके कपड़ों और देर से बाहर निकलने जैसे सवालों पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सुरक्षा की जिम्मेदारी महिलाओं की गतिविधियों को सीमित करने के बजाय अपराध रोकने और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान तैयार करने पर होनी चाहिए।
आस्था कुंज मामले के बाद तेज हुई छात्राओं की आवाज
यह मार्च दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद शुरू हुई छात्र गतिविधियों की कड़ी का हिस्सा था। इस घटना के बाद DU के अलग-अलग कॉलेजों की छात्राओं ने सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन और महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
सुरक्षा चाहिए, आवाजाही पर रोक नहीं
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सुरक्षित सड़कें, बेहतर स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन की बेहतर सुविधा और महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान शामिल रहे। छात्राओं ने रात में महिलाओं की आवाजाही पर पाबंदी जैसे उपायों के बजाय सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही मजबूत करने की मांग की।


