केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार छात्र आंदोलन और NEET-UG पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने स्पीकर से विपक्ष से चर्चा कर बहस के लिए समय तय करने और जरूरत के मुताबिक पर्याप्त समय देने का अनुरोध किया।
विपक्ष जब चाहे, चर्चा के लिए तैयार सरकार
अमित शाह ने अपने पत्र में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में कही गई बात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्र आंदोलन और NEET-UG पेपर लीक पर सदन में चर्चा के लिए पहले ही अपनी सहमति जता चुकी है।
शाह ने कहा कि विपक्ष जिस समय चर्चा चाहता है, उस पर स्पीकर विपक्ष से बात कर सकते हैं और बहस के लिए जितना समय उचित समझें, उतना दिया जा सकता है।
‘सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं’
गृह मंत्री ने कहा कि वह खुद सदन में मौजूद रहकर विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने लोकतंत्र में बातचीत और चर्चा को समाधान का रास्ता बताते हुए कहा कि संसद का उद्देश्य ही संवाद और विचार-विमर्श करना है।
शाह ने यह भी कहा कि विपक्ष की मांग पर इसी सत्र में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा हो चुकी है। हालांकि, उनके मुताबिक उस दौरान विपक्ष के किसी सांसद ने NEET परीक्षा के मुद्दे पर अपनी बात नहीं रखी थी।
संसद में दो हफ्ते से जारी है गतिरोध
संसद का मानसून सत्र पिछले करीब दो हफ्तों से हंगामे और विरोध के कारण प्रभावित है। विपक्ष 20 जुलाई के छात्र मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहा है।
इससे पहले शाह ने संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि सरकार छात्र आंदोलन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए विपक्ष को पहले सदन चलने देना होगा।
उन्होंने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया कि वह संसद से ‘गायब’ हैं। शाह ने कहा कि वह संसद सत्र शुरू होने के बाद लगातार संसद आ रहे हैं और अपने चैंबर में मौजूद रहते हैं, लेकिन जब सदन की कार्यवाही ही नहीं चलने दी जा रही हो तो अंदर जाने का क्या मतलब है।
शाह ने विपक्ष से मांगा सहयोग
अमित शाह ने कहा कि लोकतंत्र में समाधान चर्चा और संवाद से ही निकलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार होगा और संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने देगा।


