बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बोर्ड का कहना है कि यह फैसला ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान और अधिकार दिलाने में केंद्र सरकार की भूमिका के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए लिया गया है. हालांकि, मंदिर का निर्माण तभी शुरू होगा जब राज्य सरकार जमीन आवंटित करेगी और सभी प्रशासनिक मंजूरियां मिल जाएंगी.
पहली बैठक में सर्वसम्मति से पास हुआ प्रस्ताव
पीटीआई के मुताबिक, बिहार समाज कल्याण विभाग के तहत गठित बिहार राज्य ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की पहली बैठक में बोर्ड सदस्य रंजन सिंह ने पीएम मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव को सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी.
‘सम्मान और अधिकार मिलने पर आभार’
रंजन सिंह ने कहा कि बिहार में ट्रांसजेंडर समुदाय का अपना कोई मंदिर नहीं है. उनका मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019 समुदाय के लिए एक बड़ा कदम साबित हुआ, जिसने उन्हें कानूनी पहचान और संस्थागत प्रतिनिधित्व दिलाने का रास्ता खोला. बोर्ड के अनुसार, प्रस्तावित मंदिर पूजा स्थल से ज्यादा आभार और सम्मान का प्रतीक होगा.
क्या है ट्रांसजेंडर पर्सन्स एक्ट, 2019?
साल 2019 में लागू यह कानून ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था. इसमें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आवास और सार्वजनिक सेवाओं में भेदभाव पर रोक लगाने का प्रावधान है. साथ ही ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाणपत्र जारी करने, कल्याणकारी योजनाएं बनाने और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की बात भी शामिल है.
कानून को लेकर पहले भी हुआ था विरोध
हालांकि, इस कानून का कई ट्रांसजेंडर अधिकार संगठनों ने विरोध भी किया था. आलोचकों का कहना था कि पहचान प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएं हैं और इसमें शिक्षा व सरकारी नौकरियों में आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल नहीं किया गया. उनका मानना है कि समुदाय के समान अधिकारों की लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है.
सरकारी मंजूरी के बाद ही बनेगा मंदिर
फिलहाल मंदिर निर्माण सिर्फ एक प्रस्ताव है. इसके लिए राज्य सरकार की ओर से जमीन आवंटन और अन्य प्रशासनिक मंजूरियां मिलना अभी बाकी है. यदि सभी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो यह किसी मौजूदा प्रधानमंत्री के नाम पर बनने वाले दुर्लभ मंदिरों में से एक हो सकता है.


