नई दिल्ली. केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (One Nation, One Election) प्रस्ताव पर फिलहाल संसद के मौजूदा मानसून सत्र में आगे बढ़ने की संभावना नहीं है. लोकसभा ने बुधवार को इस विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ाने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी.
शीतकालीन सत्र से पहले नहीं बढ़ेगी प्रक्रिया
JPC के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने लोकसभा में समिति की समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने मंजूर कर लिया. इसके साथ ही संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर अब शीतकालीन सत्र से पहले आगे की संसदीय प्रक्रिया होने की संभावना कम हो गई है.
2029 तक लागू करने की संभावनाओं पर मंथन
41 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति देशभर में संवैधानिक विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों, शिक्षाविदों और नागरिक संगठनों से राय ले रही है. समिति इस बात पर भी विचार कर रही है कि वर्ष 2029 के आम चुनाव तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था कैसे लागू की जा सकती है.
सरकार ने गिनाए प्रस्ताव के फायदे
केंद्र सरकार का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से बार-बार होने वाले चुनावों का खर्च कम होगा, प्रशासनिक कामकाज में बाधा नहीं आएगी और सरकारी कर्मचारियों व शिक्षकों को बार-बार चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाना पड़ेगा. सरकार का दावा है कि इससे शासन व्यवस्था अधिक स्थिर होगी और देश के विकास को गति मिलेगी.
विपक्ष ने जताई आपत्ति
विपक्षी दल इस प्रस्ताव का लगातार विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है और बड़े राष्ट्रीय दलों को अनुचित राजनीतिक लाभ मिल सकता है. विपक्ष का यह भी तर्क है कि संसदीय व्यवस्था में सरकारें समय से पहले गिर सकती हैं, ऐसे में पूरे देश में एक समान चुनाव चक्र बनाए रखना व्यावहारिक नहीं होगा.
देशभर में जारी है परामर्श प्रक्रिया
संयुक्त संसदीय समिति गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गोवा समेत कई राज्यों का दौरा कर विभिन्न पक्षों से सुझाव ले चुकी है. समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार इस विधेयक पर आगे की रणनीति तय करेगी.


