ब्रिटेन के पीटरबरो शहर में स्थित करीब 40 साल पुराने भारत हिंदू समाज (Bharat Hindu Samaj) मंदिर का भविष्य अनिश्चितता में है. यह मंदिर जिस परिसर में संचालित होता है, उसे स्थानीय प्रशासन ने एक इस्लामिक संगठन को बेच दिया है, जो वहां नई मस्जिद और कम्युनिटी सेंटर बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इस फैसले के खिलाफ मंदिर ट्रस्ट हाई कोर्ट पहुंच गया है और बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है.
युगांडा से निकाले गए भारतीयों ने 1986 में की थी मंदिर की स्थापना
भारत हिंदू समाज (BHS) मंदिर की स्थापना उन भारतीय परिवारों ने की थी जिन्हें 1972 में युगांडा के तत्कालीन तानाशाह ईदी अमीन द्वारा देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था. वर्ष 1986 से यह मंदिर पीटरबरो के न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स में संचालित हो रहा है. यह पूर्वी इंग्लैंड के लगभग 14 हजार हिंदुओं के लिए प्रमुख पूजा स्थल माना जाता है.
मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के अलावा योग कक्षाएं, गुजराती और हिंदी भाषा की शिक्षा, स्वास्थ्य कार्यक्रम, वरिष्ठ नागरिकों के लिए लंच क्लब तथा विभिन्न सामुदायिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं.
ट्रस्ट का आरोप. 13 लाख पाउंड की पेशकश के बावजूद नहीं मिला जवाब
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2025 में परिसर खरीदने के लिए 13 लाख पाउंड (1.3 मिलियन पाउंड) की पेशकश की थी. ट्रस्टी गौरी चौधरी का आरोप है कि कई महीनों तक उनकी पेशकश पर कोई जवाब नहीं दिया गया. बाद में उन्हें बताया गया कि संपत्ति को ओपन बिडिंग में डाल दिया गया है और अंतिम चरण में किसी अन्य बोलीदाता का चयन हो चुका है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह परिसर अंततः यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन (UKIM) से जुड़े खदीजा मस्जिद (Khadijah Mosque) को बेचने का फैसला किया गया.
परिषद का दावा, भारी कर्ज कम करने के लिए लिया गया फैसला
पीटरबरो सिटी काउंसिल ने यह संपत्ति अपनी लगभग 500 मिलियन पाउंड की वित्तीय देनदारी कम करने की योजना के तहत बेचने का निर्णय लिया. काउंसिल का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और कानूनी तरीके से पूरी की गई.
वहीं खदीजा मस्जिद का कहना है कि उसका मौजूदा परिसर छोटा पड़ गया है. इसलिए वह नए परिसर में एक “यूनिटी सेंटर” विकसित करना चाहती है, जहां नमाज के साथ शिक्षा, खेल और सामुदायिक गतिविधियों की सुविधाएं भी उपलब्ध हों.
हाई कोर्ट में पहुंचा मामला, मंदिर ट्रस्ट ने उठाए कानूनी सवाल
मंदिर ट्रस्ट ने अदालत से अंतरिम राहत हासिल करते हुए बिक्री पर रोक लगवा दी है. साथ ही GoFundMe अभियान के जरिए दुनियाभर से करीब 86 हजार पाउंड की आर्थिक सहायता भी जुटाई गई है.
हाई कोर्ट में ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि उनका विवाद किसी धर्म विशेष से नहीं, बल्कि सिटी काउंसिल की निर्णय प्रक्रिया से है. ट्रस्ट का तर्क है कि काउंसिल ने इक्वैलिटी एक्ट 2010 के तहत क्षेत्र के एकमात्र हिंदू मंदिर पर पड़ने वाले प्रभाव का सही तरीके से आकलन नहीं किया.
हिंदू समुदाय में नाराजगी, काउंसिल ने दिया भरोसा
मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि पीटरबरो में पहले से कई मस्जिदें और 100 से अधिक चर्च मौजूद हैं, जबकि करीब 50 किलोमीटर के दायरे में यह एकमात्र हिंदू मंदिर है. ऐसे में इसी मंदिर को हटाने का फैसला समुदाय के बीच चिंता का विषय बन गया है.
वहीं पीटरबरो सिटी काउंसिल की प्रमुख शबीना कय्यूम ने कहा कि मामला फिलहाल हाई कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की जाएगी. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस फैसले से हिंदू समुदाय में चिंता और नाराजगी है. उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन भारत हिंदू समाज के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की कोशिश कर रहा है और समुदाय को बिना किसी व्यवस्था के नहीं छोड़ा जाएगा.
हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं सबकी निगाहें
फिलहाल हाई कोर्ट यह तय करेगा कि संपत्ति की बिक्री प्रक्रिया कानूनी रूप से सही थी या नहीं. जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक बिक्री पर लगी रोक जारी रहेगी और पीटरबरो के इस ऐतिहासिक हिंदू मंदिर का भविष्य अधर में बना रहेगा.


