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मालदेवता की सास-बहू ने राखियों से मचाई धूम, पिछले साल ₹25 हजार मुनाफा; अब 2 हजार राखियां बनाने का लक्ष्य

Mintwire by Mintwire
24/08/2026
in उत्तराखंड, राज्य
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रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून की ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार मिलने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं हैंडमेड राखियों को स्वरोजगार का जरिया बनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं पारंपरिक से लेकर आधुनिक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं।

इसी बीच रायपुर विकासखंड के मालदेवता की सास-बहू की जोड़ी लीला रावत और अलका रावत अपने राखी कारोबार को लेकर चर्चा में हैं। दोनों ने मिलकर पिछले साल करीब 1,200 राखियां तैयार कर लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा कमाया था। इस वर्ष उन्होंने कारोबार बढ़ाते हुए 2,000 से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें करीब 1,500 राखियां अब तक तैयार हो चुकी हैं।

प्राइवेट नौकरी छोड़ी, सास के साथ शुरू किया कारोबार

अलका रावत ने पिछले साल प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला रावत के साथ स्वरोजगार शुरू करने का फैसला लिया। दोनों रायपुर ब्लॉक की नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं।

दोनों ने मालदेवता क्षेत्र में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान भी शुरू की है। यहां राखियों के अलावा अन्य हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी तैयार कर बेचे जाते हैं।

अलका के मुताबिक, स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आय के नए अवसर मिले और सरकारी योजनाओं के माध्यम से अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

पिछले साल 1,200 राखियों से हुआ ₹25 हजार का मुनाफा

लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन की मदद से उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ। दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बेचीं, जिससे लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ।

इस सफलता के बाद दोनों का उत्साह बढ़ा और इस साल राखी कारोबार को और विस्तार देने का लक्ष्य तय किया गया।

Instagram से भी मिल रहे राखियों के ऑर्डर

अब इन महिलाओं का कारोबार केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के Instagram प्लेटफॉर्म के जरिए भी ग्राहकों से राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं।

महिलाएं ऑनलाइन मिलने वाले ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। यानी मालदेवता की इन महिलाओं का हुनर अब स्थानीय बाजार से निकलकर डिजिटल बाजार तक पहुंच गया है।

महाकाल से रुद्राक्ष और नजरबट्टू तक, कई डिजाइन

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे और रिबन समेत अलग-अलग सामग्रियों से राखियां तैयार कर रही हैं।

इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू समेत कई पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन शामिल हैं। खास बात यह है कि राखियों की डिजाइनिंग से लेकर प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार तक का काम महिलाएं खुद संभाल रही हैं।

2016 से NRLM से जुड़ी हैं लीला रावत

आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला, जिससे स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

उनके मुताबिक, समूह से जुड़ी महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ कारोबार का भी विस्तार कर रही हैं।

रायपुर ही नहीं, सहसपुर और डोईवाला की महिलाएं भी मैदान में

राखी निर्माण में केवल रायपुर की महिलाएं ही नहीं, बल्कि सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर काम कर रही हैं।

डोईवाला की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इनकी बिक्री रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है।

वहीं, सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर की महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनकी राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है और सेलाकुई, सहसपुर तथा विकासनगर में भी बाजार मिल रहा है।

देहरादून के प्रमुख मॉलों में लगेंगे राखियों के स्टॉल

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉलों में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने आमजन से अपील की कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करें।

24 से 27 अगस्त तक सचिवालय में पांच स्टॉल

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी NRLM से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं बेहतर गुणवत्ता वाली राखियां तैयार कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत लगाए जाने वाले इन स्टॉलों पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं राखियों के साथ-साथ पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री भी करेंगी।

राखी के बहाने हुनर को मिला बाजार

मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी की कहानी बताती है कि जब स्थानीय हुनर को सही बाजार और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलता है तो महिलाएं इसे आमदनी और आत्मनिर्भरता के अवसर में बदल सकती हैं।

रक्षाबंधन के मौके पर देहरादून की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही ये राखियां सिर्फ त्योहार की खुशियां नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि नारी सशक्तीकरण और स्थानीय स्वरोजगार की एक नई तस्वीर भी पेश कर रही हैं।

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