रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई बड़ी कंपनियों के नाम सुनते हैं। कभी शॉपिंग करते समय, कभी बैंकिंग में, तो कभी मोबाइल, टीवी, इंटरनेट, फिल्म या सफर के दौरान। PVR, IBM, DLF, ICICI, HSBC, JBL, DHL, HCL और BHEL जैसे नाम हमारे लिए बेहद आम हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन छोटे-छोटे नामों के पीछे आखिर पूरा नाम क्या है और इन नामों की शुरुआत कैसे हुई? कुछ कंपनियों के नाम उनके संस्थापकों के नाम से बने हैं, तो कुछ के नाम उनके शुरुआती कारोबार या संस्थान की पहचान बताते हैं।
आइए जानते हैं 12 चर्चित कंपनियों के नामों की फुल फॉर्म और उनसे जुड़े रोचक तथ्य।
1. PVR — Priya Village Roadshow
सिनेमा देखने वालों के लिए PVR नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। PVR का मूल नाम Priya Village Roadshow था। कंपनी 1995 में इसी नाम से शुरू हुई थी और 2002 में इसका नाम बदलकर PVR Limited कर दिया गया।
PVR नाम में Priya दिल्ली के प्रिय सिनेमा से जुड़ा था, जबकि Village Roadshow ऑस्ट्रेलियाई कंपनी Village Roadshow के साथ साझेदारी की ओर इशारा करता था। यानी आज जिस नाम को लोग सिर्फ एक सिनेमाघर ब्रांड के तौर पर जानते हैं, उसके पीछे एक साझेदारी की कहानी भी छिपी है।
2. IBM — International Business Machines
IBM का पूरा नाम International Business Machines है। हालांकि कंपनी की शुरुआत सीधे IBM नाम से नहीं हुई थी। 1911 में कई कंपनियों के विलय से Computing-Tabulating-Recording Company (C-T-R) बनी थी।
बाद में थॉमस जे. वॉटसन के नेतृत्व में कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया और 1924 में इसका नाम बदलकर International Business Machines कर दिया गया।
यानी IBM का नाम ही उस दौर की महत्वाकांक्षा बताता था—ऐसी कंपनी जो सिर्फ एक देश तक सीमित न रहे।
3. DLF — Delhi Land & Finance
रियल एस्टेट की दुनिया में DLF बेहद जाना-पहचाना नाम है। इसका मूल नाम Delhi Land & Finance था। DLF की स्थापना 1946 में चौधरी रघवेंद्र सिंह ने की थी। कंपनी ने शुरुआत में दिल्ली में शहरी कॉलोनियों के विकास पर काम किया और शुरुआती वर्षों में 22 शहरी कॉलोनियां विकसित कीं।
बाद में DLF ने दिल्ली-एनसीआर के बाहर भी विस्तार किया और गुरुग्राम के विकास में इसकी बड़ी भूमिका रही। 1985 में कंपनी ने गुरुग्राम में विस्तार शुरू किया था।
4. ICICI — Industrial Credit and Investment Corporation of India
ICICI का पूरा नाम Industrial Credit and Investment Corporation of India है।
ICICI की स्थापना 1955 में विश्व बैंक, भारत सरकार और भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की पहल पर हुई थी। इसका मूल उद्देश्य भारतीय उद्योगों को मध्यम और दीर्घकालीन परियोजना वित्त उपलब्ध कराना था।
समय के साथ ICICI ने सिर्फ प्रोजेक्ट फाइनेंस तक सीमित रहने के बजाय बैंकिंग और विभिन्न वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में विस्तार किया। आज ICICI नाम देश के प्रमुख वित्तीय ब्रांडों में शामिल है।
5. HSBC — Hongkong and Shanghai Banking Corporation
HSBC का पूरा नाम The Hongkong and Shanghai Banking Corporation है।
इसकी शुरुआत 1865 में हांगकांग में हुई थी। इसे थॉमस सदरलैंड ने स्थापित किया था, क्योंकि उस समय एशिया और यूरोप के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा था और स्थानीय कारोबारियों को बेहतर बैंकिंग सेवाओं की जरूरत थी। बैंक ने 3 मार्च 1865 को हांगकांग में कारोबार शुरू किया और करीब एक महीने बाद शंघाई में भी कार्यालय खोला।
इसलिए HSBC के नाम में Hongkong और Shanghai दोनों शहरों की पहचान आज भी दिखाई देती है।
6. JBL — James B. Lansing
JBL का नाम किसी लंबे संस्थागत नाम का संक्षिप्त रूप नहीं, बल्कि इसके संस्थापक James Bullough Lansing के नाम से जुड़ा है।
लैंसिंग ने 1927 में लॉस एंजिल्स में स्पीकर और ऑडियो उपकरणों के कारोबार की शुरुआत की थी। बाद में उनकी कंपनी James B. Lansing Sound के नाम से जानी गई और यही नाम आगे चलकर JBL के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
आज JBL दुनिया के चर्चित ऑडियो ब्रांडों में गिना जाता है, लेकिन इसके नाम के पीछे असल में एक व्यक्ति का नाम छिपा है।
7. DHL — Dalsey, Hillblom and Lynn
DHL का नाम सुनते ही सबसे पहले कूरियर और पार्सल डिलीवरी याद आती है। लेकिन इसका नाम किसी तकनीकी शब्द से नहीं बना है।
DHL = Dalsey, Hillblom and Lynn
ये इसके तीन संस्थापकों—Adrian Dalsey, Larry Hillblom और Robert Lynn—के उपनामों के शुरुआती अक्षर हैं। कंपनी की शुरुआत 1969 में हुई थी।
यानी DHL का ब्रांड नाम असल में उसके तीन संस्थापकों की पहचान को अपने साथ लेकर चलता है।
8. HCL — Hindustan Computers Limited
HCL का पूरा नाम Hindustan Computers Limited है। कंपनी की स्थापना 1976 में हुई थी। हाल के एक प्रकाशित विवरण के अनुसार, छह भारतीय इंजीनियरों ने करीब 1.87 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ HCL की शुरुआत की थी।
दिलचस्प बात यह है कि उस दौर में भारत में कंप्यूटर तकनीक आज की तरह आम नहीं थी। HCL ने इसी शुरुआती दौर में भारतीय कंप्यूटिंग क्षेत्र में अपनी पहचान बनानी शुरू की।
9. BHEL — Bharat Heavy Electricals Limited
BHEL का पूरा नाम Bharat Heavy Electricals Limited है। यह भारत की प्रमुख इंजीनियरिंग और भारी विद्युत उपकरण कंपनियों में से एक है।
BHEL की औपचारिक शुरुआत 13 नवंबर 1964 को हुई। इससे पहले 1956 में Heavy Electricals (India) Limited नाम से एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्थापित की गई थी। बाद में दोनों संस्थाओं का विलय हुआ और जनवरी 1974 में संयुक्त रूप से BHEL का वर्तमान स्वरूप सामने आया।
हरिद्वार समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके बड़े संयंत्र स्थापित किए गए और बिजली उत्पादन से जुड़े भारी उपकरणों के निर्माण में कंपनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
10. TCS — Tata Consultancy Services
TCS का पूरा नाम Tata Consultancy Services है। इसकी स्थापना 1968 में Tata Sons की एक डिवीजन के रूप में हुई थी।
शुरुआती दौर में TCS ने बैंकिंग, पेरोल और अकाउंटिंग जैसी सेवाओं से काम शुरू किया। बाद में यह भारत की सबसे बड़ी आईटी और कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल हो गई।
दिलचस्प तथ्य यह है कि TCS ने शुरुआती वर्षों में ही भारत से बाहर प्रोजेक्ट हासिल करना शुरू कर दिया था और 1973 में ईरान में अपना पहला विदेशी प्रोजेक्ट हासिल किया।
11. Wipro — Western India Vegetable Products
आज Wipro को दुनिया की प्रमुख आईटी कंपनियों में गिना जाता है, लेकिन इसकी शुरुआती कहानी तकनीक से बिल्कुल अलग थी।
Wipro की शुरुआत 1945 में Western India Vegetable Products Limited के रूप में हुई थी और कंपनी ने शुरुआत में महाराष्ट्र के अमलनेर में वनस्पति तेल के कारोबार से काम शुरू किया था। बाद में कंपनी ने साबुन और अन्य कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में विस्तार किया और आगे चलकर आईटी क्षेत्र में प्रवेश किया।
यानी आज की टेक कंपनी Wipro की जड़ें असल में खाद्य तेल के कारोबार में थीं।
12. Infosys — नाम छोटा, सफर बेहद बड़ा
Infosys को आमतौर पर लोग किसी लंबी फुल फॉर्म के बजाय सीधे ब्रांड नाम के रूप में जानते हैं। कंपनी की स्थापना 1981 में पुणे में सात इंजीनियरों ने महज 250 अमेरिकी डॉलर की शुरुआती पूंजी के साथ की थी। उस समय कंपनी का नाम Infosys Consultants Private Limited था।
1992 में कंपनी का नाम Infosys Technologies Private Limited और फिर Infosys Technologies Limited हुआ। 2011 में इसे बदलकर Infosys Limited कर दिया गया। कंपनी के मुताबिक यह बदलाव उसके टेक्नोलॉजी सर्विस प्रोवाइडर से व्यापक बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन पार्टनर बनने की यात्रा को दर्शाता था।
नाम छोटा, कहानी बड़ी!
इन कंपनियों की कहानियां बताती हैं कि किसी ब्रांड का छोटा-सा नाम भी अपने भीतर संस्थापक, शहर, शुरुआती कारोबार, साझेदारी और कंपनी के शुरुआती उद्देश्य की कहानी छिपाए हो सकता है।
PVR के पीछे साझेदारी की कहानी है, IBM के पीछे वैश्विक विस्तार का सपना, DLF के पीछे दिल्ली के रियल एस्टेट विकास की शुरुआत, DHL के पीछे तीन संस्थापकों के नाम और Wipro के पीछे वनस्पति तेल का कारोबार।
अब अगली बार जब आप इन कंपनियों के नाम सुनें, तो शायद आपको सिर्फ उनका ब्रांड नहीं, बल्कि उनके नाम के पीछे छिपी पूरी कहानी भी याद आएगी।


