दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे पर बारिश से हुए नुकसान की मरम्मत के बाद भी सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। थानाभवन क्षेत्र से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में मरम्मत का काम पूरा कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि कई स्थानों पर सड़क के नीचे अभी भी खालीपन महसूस हो रहा है। इससे भविष्य में सड़क की मजबूती और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
बारिश ने उजागर की निर्माण की स्थिति
हाल ही में हुई भारी बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे के किनारों की मिट्टी बह गई थी। इसके कारण कई जगहों पर गहरे गड्ढे बन गए और सड़क के नीचे की परत प्रभावित हुई। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे।
जेसीबी से भरे गए गड्ढे
बारिश रुकने के बाद निर्माण एजेंसी ने जेसीबी मशीनों की मदद से प्रभावित हिस्सों में मिट्टी डालकर गड्ढों को भर दिया। सतह पर सड़क सामान्य दिखाई दे रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर सड़क के नीचे खालीपन अभी भी मौजूद है, जिससे भविष्य में समस्या बढ़ सकती है।
भारी वाहनों से बढ़ सकता है खतरा
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सड़क के नीचे की कमजोर परत को पूरी तरह मजबूत नहीं किया गया तो भारी वाहनों के लगातार दबाव से सड़क धंसने का खतरा बना रहेगा। यह एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग बनने वाला है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है।
तकनीकी जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और निर्माण कंपनी से मांग की है कि केवल सतही मरम्मत पर निर्भर रहने के बजाय प्रभावित हिस्सों की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जहां आवश्यकता हो, वहां दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना की आशंका न रहे।
एनएचएआई की प्रतिक्रिया नहीं मिली
इस मामले में एनएचएआई के परियोजना निदेशक नरेंद्र सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उन्होंने न तो फोन कॉल का जवाब दिया और न ही भेजे गए संदेश का कोई उत्तर दिया। ऐसे में इस मुद्दे पर एनएचएआई की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
यात्रियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को उत्तर भारत की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में गिना जा रहा है। ऐसे में निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे सवालों का समय रहते समाधान करना जरूरी माना जा रहा है, ताकि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सफर मिल सके।


