अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ट्रस्ट की बुधवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में कई अहम बदलाव किए हैं।
महेश भगचंदका बने कोषाध्यक्ष
ट्रस्ट में महेश भगचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, स्वामी गोविंददेव गिरि अब महासचिव के पद पर नहीं रहेंगे। ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी—महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडेय और डॉ. निर्मला यादव—को भी शामिल किया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब ट्रस्ट दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं और वित्तीय मामलों की जांच के बीच अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने पर काम कर रहा है।
कौन हैं एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा?
जीतेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन लिया था। उन्होंने 38 साल से ज्यादा समय तक सेवा दी और 3,000 से अधिक घंटे उड़ान का अनुभव हासिल किया।
वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रह चुके हैं। उन्होंने वायुसेना की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और दो फ्रंटलाइन एयरबेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग भी रहे।
जनवरी 2025 में उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उन्होंने इस कमांड का नेतृत्व किया। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल समेत कई सैन्य सम्मान मिल चुके हैं।
ट्रस्ट के मुताबिक, मिश्रा मूल रूप से देवरिया जिले के रहने वाले हैं और उनका क्षेत्र अयोध्या के करीब है। उनके पिता लेक्चरर थे।
5,585 आवेदनों में से हुआ चयन
CEO के चयन की प्रक्रिया 6 जुलाई 2026 को शुरू हुई थी। इसके लिए रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई गई थी।
कमेटी को देशभर से कुल 5,585 आवेदन मिले। इनमें से 16 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट कर 11 और 12 अगस्त को अयोध्या बुलाया गया। बातचीत और मूल्यांकन के बाद तीन नामों की सिफारिश की गई, जिनमें एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह विश्वराव और श्रुति भारद्वाज शामिल थे। ट्रस्ट ने अंत में मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई।
CEO की जिम्मेदारियां होंगी व्यापक
ट्रस्ट अब अपने डीड में संशोधन कर CEO की शक्तियों और जिम्मेदारियों को औपचारिक रूप से तय करने की तैयारी में है। CEO को प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक मामलों की जिम्मेदारी दी जाएगी।
उनका काम ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करना, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और संगठन के भविष्य के विकास की निगरानी करना होगा।
दान और वित्तीय व्यवस्था पर भी चर्चा
बैठक में कथित दान चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी SIT जांच की भी समीक्षा की गई। ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया, जिसमें SIT जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
बैठक में नकद चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसके लिए दो बैंकों और एक IIT से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाएगा।
ट्रस्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में उसकी कुल आय 237 करोड़ रुपये रही, जबकि खर्च 11 करोड़ रुपये रहा। निर्माण और संबंधित कार्यों पर 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च हुआ। 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के पास कुल उपलब्ध धनराशि 1,882 करोड़ रुपये थी।


