उत्तराखंड में जनगणना 2026 के पहले चरण का कार्य तय समय सीमा के करीब पहुंच गया है, लेकिन अब तक केवल 67 प्रतिशत मकानों की गणना ही पूरी हो सकी है। राज्य में 25 अप्रैल से घर-घर भवन गणना और सूचीकरण का अभियान चल रहा है, जिसके तहत प्रगणक लोगों से 33 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जुटा रहे हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में लोगों के असहयोग और विभागीय लापरवाही के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है।
जनगणना निदेशालय ने अब सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जो लोग जानकारी देने से इनकार करेंगे या प्रगणकों को घर में प्रवेश नहीं करने देंगे, उनके खिलाफ जनगणना अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर अभियान को गंभीरता से पूरा कराने को कहा है।
विभागों की लापरवाही भी बनी बाधा
जनगणना कार्य में लगे कई कर्मचारी अन्य विभागों में नियमित ड्यूटी भी कर रहे हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारी उन्हें समय पर नहीं छोड़ रहे, जिसके चलते कर्मचारी देर शाम या रात में जनगणना का काम करने को मजबूर हैं। कुछ विभागों द्वारा जनगणना ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों की आकस्मिक अवकाश (सीएल) लगाने की शिकायत भी सामने आई है। निदेशालय ने इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए संबंधित विभागों को चेतावनी दी है।
सुरक्षा को लेकर भी चिंता
देहरादून में एक महिला प्रगणक पर घर का दरवाजा खुलते ही पालतू खूंखार कुत्ते के हमले का मामला सामने आया है। इस घटना पर जनगणना निदेशक ने नाराजगी जताते हुए नगर निगम अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रगणकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
पूर्व सैनिकों के असहयोग की शिकायत
जनगणना टीमों ने कुछ क्षेत्रों में पूर्व सैनिकों के असहयोग की भी शिकायत की है। बताया जा रहा है कि कई लोग प्रगणकों को घर में प्रवेश तक नहीं दे रहे, जिससे सर्वे कार्य बाधित हो रहा है। जनगणना निदेशालय ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे देशहित के इस महत्वपूर्ण अभियान में सहयोग करें ताकि सही और सटीक आंकड़े समय पर तैयार किए जा सकें।
छह दिन में पूरा करना है काम
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन पहले ही सभी जिलाधिकारियों को जनगणना कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दे चुके हैं। अब अभियान पूरा होने में केवल छह दिन शेष हैं और प्रशासन तेजी से शेष कार्य पूरा कराने में जुटा हुआ है।


