भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के तहत हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया. पर्यावरण प्रेमी रेनू पॉल की ओर से दाखिल याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया. कोर्ट के इस फैसले से फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और परियोजना से जुड़े पक्षों को राहत मिली है.
पेड़ों की कटाई का लगातार हो रहा विरोध
भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना को लेकर पिछले कई दिनों से पर्यावरण प्रेमी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में पुराने और छायादार पेड़ों को काटा जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ेगा. विरोध के बावजूद अब तक 700 से अधिक पेड़ों की कटाई की जा चुकी है.
मुख्यमंत्री ने दिए थे कटान रोकने के निर्देश
पेड़ों की कटाई को लेकर बढ़ते विरोध के बीच कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित अधिकारियों को पेड़ों के कटान पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद भी यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है.
रेनू पॉल ने लगाए थे गंभीर आरोप
पर्यावरण प्रेमी रेनू पॉल ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सरकार के पास पेड़ों की कटाई के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति नहीं है. इसके बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटा जा रहा है, जो न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में आम जनता के साथ-साथ न्यायालय को भी गुमराह कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका को खारिज कर दिया. इस फैसले के बाद परियोजना से जुड़े पक्षों को राहत मिली है. वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस मामले में आगे होने वाले संवाद के दौरान सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखेगी.


