केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों की लगातार मांग और देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए कहा कि देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में नहीं फंसने दिया जाएगा.
इस्तीफे में युवाओं का किया जिक्र
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि जंतर-मंतर और देशभर में बनी परिस्थितियों का राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे, किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे और छात्र पढ़ाई व अपने करियर पर ध्यान दे सकें, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है.
जून से जारी था छात्रों का आंदोलन
देशभर में पिछले कई दिनों से छात्र NEET-UG विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. CJP के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी. उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन से जुड़े छात्रों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई.
CJP ने जारी किया जश्न का वीडियो
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया. वीडियो में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने समर्थकों के साथ मंच पर खुशी मनाते और एक-दूसरे को गले लगाते नजर आए.
‘We Have Done It’, बोले अभिजीत दीपके
वीडियो में अभिजीत दीपके ने कहा, “We have done it. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. कहा जाता था कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन युवाओं ने दिखा दिया कि अगर लोग एकजुट हों तो बदलाव संभव है.”
इसके बाद उन्होंने उन छात्रों को याद किया, जिनकी मौत को आंदोलन से जोड़ते हुए प्रदर्शनकारी न्याय की मांग कर रहे थे. उन्होंने मंच से कई नामों का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी.
‘युवा एकजुट हों तो बदलाव संभव है’
अभिजीत दीपके ने कहा कि देश के युवाओं ने साबित कर दिया है कि यदि वे एकजुट होकर आवाज उठाएं तो बड़े से बड़ा फैसला भी बदल सकता है. उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और देश के लोगों की जीत है.
‘मुझे हीरो मत बनाइए’
अपने संबोधन में अभिजीत दीपके ने समर्थकों से अपील की कि उन्हें इस आंदोलन का हीरो न बनाया जाए. उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति को संविधान से बड़ा मानने की गलती नहीं दोहरानी चाहिए. उनके मुताबिक लोकतंत्र में सबसे ऊपर संविधान और जनता होती है, कोई व्यक्ति नहीं.
कैंडल मार्च निकालने की अपील
अभिजीत दीपके ने देशभर के लोगों से शाम 6 बजे अपने-अपने राज्यों और जिलों में कैंडल मार्च निकालने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह उन छात्रों की स्मृति में होना चाहिए, जिनकी मौत को लेकर आंदोलन में न्याय की मांग उठाई गई है.
‘यह तो सिर्फ शुरुआत है’
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के लोग अब जाग चुके हैं और लोकतंत्र की नई सुबह हो चुकी है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है. अंत में उन्होंने सभी प्रदर्शनकारी छात्रों को सलाम किया, जो पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे हैं.


