देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में नदियों के उफान से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। उत्तराखंड में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में अब तक 7 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 172 से ज्यादा सड़कें बंद हैं। प्रशासन और SDRF की टीमें राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं।
उत्तराखंड में 172 से ज्यादा सड़कें बंद
बारिश और भूस्खलन के कारण उत्तराखंड में कई सड़कें और हाईवे प्रभावित हुए हैं। पिथौरागढ़, नैनीताल और बागेश्वर में एक-एक हाईवे भी बंद है। कई स्थानों पर JCB और दूसरी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर रास्ता खोलने का काम जारी है।
हल्द्वानी से गौला नदी में करीब 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद ऊधम सिंह नगर के किच्छा, पुलभट्टा, शांतिपुरी और सूर्यनगर में प्रशासन ने लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दी है। खटीमा के वनगांव में खकरा नदी का जलस्तर बढ़ने से दो दर्जन से ज्यादा परिवार प्रभावित हुए हैं। कुछ परिवारों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।
पौड़ी में मां-बेटी की नदी में बहने से मौत
पौड़ी के कोटद्वार में दर्दनाक हादसे में एक मां और उसकी डेढ़ साल की बेटी की मौत हो गई। बताया गया कि स्नेह क्षेत्र में कोल्हू नदी पार करते समय बच्ची तेज बहाव में बह गई। उसे बचाने की कोशिश में 26 वर्षीय मां भी नदी में बह गई। SDRF और पुलिस ने दोनों के शव बरामद कर लिए हैं।
अल्मोड़ा में मलबे में दबकर 5 लोगों की मौत
अल्मोड़ा में अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की मौत की सूचना है। हवालबाग के उदयुड़ा गांव में मकान पर मलबा गिरने से दो महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई। वहीं धार के टूनी क्षेत्र में मलबे में दबने से दो नेपाली मजदूरों की जान चली गई।
भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए नैनीताल, चंपावत, ऊधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में 2 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला लिया गया है।
नैनीताल में नदियां उफान पर
नैनीताल में कोसी और शिप्रा नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। प्रशासन ने गरमपानी, खैरना, बेतालघाट और रामनगर के नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। कैंची धाम के पास भी शिप्रा नदी का पानी बढ़ा है।
हल्द्वानी के रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर गौला नदी का जलस्तर बढ़ने से अंतिम संस्कार के लिए रखे शव और चिताएं भी तेज बहाव की चपेट में आ गईं, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी मच गई।
टिहरी-चमोली में लैंडस्लाइड, केदारनाथ यात्रा रुकी
टिहरी में भारी बारिश के बाद NH-34 समेत कई सड़कों पर मलबा आ गया है। घनसाली और बालगंगा क्षेत्र में भूस्खलन के कारण कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है।
चमोली में थराली-देवाल मार्ग लैंडस्लाइड के चलते बंद है। वहीं सोनप्रयाग में लगातार बारिश को देखते हुए केदारनाथ यात्रा रोक दी गई है। मसूरी-देहरादून मार्ग भी पानीवाला बैंड के पास सड़क धंसने से प्रभावित हुआ है।
यूपी में भी बाढ़ जैसे हालात
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से हालात बिगड़ गए हैं। सीतापुर में मकान की मिट्टी की दीवार गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। गाजीपुर में गंगा में नहाते समय दो नाबालिग लड़कियां बह गईं, जिनकी तलाश जारी है।
बलिया में गंगा का पानी रिहायशी इलाकों में पहुंच गया है और करीब 20 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और आवागमन के लिए 47 नावें लगाई गई हैं। प्रशासन के मुताबिक गंगा खतरे के निशान से करीब 1.60 मीटर ऊपर बह रही है।
वाराणसी में गंगा डेंजर मार्क के ऊपर
वाराणसी में गंगा चेतावनी स्तर को पार कर चुकी है। जलभराव के कारण कई इलाकों में नावों से आवाजाही हो रही है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर पानी भरने के बाद अंतिम संस्कार छतों और गलियों में किए जा रहे हैं। वरुणा नदी के किनारे रहने वाले कुछ परिवारों को राहत शिविरों में भेजा गया है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से करीब 4 मीटर ऊपर बह रही है। रामघाट और निर्मोही अखाड़ा समेत कई इलाके जलमग्न हैं। SDRF और NDRF की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं।
झारखंड के 10 जिलों में फ्लैश फ्लड का अलर्ट
झारखंड में भी भारी बारिश के बाद खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है। गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सिमडेगा में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया में सबसे ज्यादा 217 मिमी बारिश दर्ज की गई। IMD ने गढ़वा, पलामू, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में रेड अलर्ट, जबकि लातेहार, लोहरदगा, गुमला, खूंटी और सरायकेला-खरसावां में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
जमशेदपुर में खरकई और स्वर्णरेखा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण भी जलस्तर बढ़ने की स्थिति बनी हुई है।


