नैनीताल से उत्तराखंड हाई कोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने की प्रक्रिया के बीच अब रामपुर रोड स्थित बेलबाबा क्षेत्र सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। गौलापार में प्रस्तावित 26 हेक्टेयर वन भूमि पर निर्माण के लिए 4,238 पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी, जबकि बेलबाबा में पहले ही बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान हो चुका है। ऐसे में यहां निर्माण कार्य अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है। करीब तीन महीने पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने बेलबाबा क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट भी तैयार की थी, हालांकि अंतिम फैसला शासन स्तर पर होना बाकी है।
वन भूमि हस्तांतरण में अटका गौलापार का प्रस्ताव
राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद गौलापार की 26 हेक्टेयर वन भूमि को चिन्हित किया गया, लेकिन सीमांकन के दौरान हजारों पेड़ों की कटाई की जरूरत सामने आई। बाद में वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव केंद्रीय हाई एम्पावर्ड कमेटी ने खारिज कर दिया, जिससे इस विकल्प पर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।
बेलबाबा में पहले ही कट चुके हैं 41 हजार पेड़
बेलबाबा क्षेत्र में 121 हेक्टेयर वन भूमि से करीब 41 हजार सागौन और खैर के पेड़ों का नियमानुसार कटान पहले ही किया जा चुका है। वर्तमान में यहां करीब 64 हेक्टेयर भूमि खाली पड़ी है, जिसे हाई कोर्ट परिसर के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। यदि इस स्थान को मंजूरी मिलती है तो केवल वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
गौलापार में फिर शुरू हो सकती है ISBT परियोजना
यदि हाई कोर्ट के लिए बेलबाबा को अंतिम रूप दिया जाता है, तो गौलापार में पहले से लंबित आईएसबीटी परियोजना को दोबारा शुरू किए जाने की संभावना भी बढ़ सकती है। परिवहन विभाग ने हाल ही में गौलापार सहित कई स्थानों का सर्वे किया है और पुरानी आईएसबीटी साइट को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। ऐसे में हाई कोर्ट और आईएसबीटी, दोनों परियोजनाओं को अलग-अलग स्थानों पर विकसित करने की राह खुल सकती है।


