देशभर में पेपर लीक के मुद्दे पर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी न तो भटकी हुई है और न ही दिशाहीन, बल्कि उसे समझने और उसका विश्वास जीतने के लिए आदेश नहीं, संवाद और सहमति की आवश्यकता है.
‘नई पीढ़ी सवाल पूछती है’
‘विश्व मांगल्य सभा’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज के युवा हर बात पर सवाल पूछते हैं और उन्हें तर्क के साथ जवाब देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और बड़ों को युवाओं के साथ समय बिताना चाहिए और उनके साथ लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, “नई पीढ़ी सवाल पूछती है। हमें उन्हें समझाना होगा, उन्हें अपनापन देना होगा और उनके साथ संवाद करना होगा।”
‘डिक्टेशन नहीं, डिस्कशन होना चाहिए’
भागवत ने कहा कि युवाओं का विश्वास जीतने का तरीका आदेश देना नहीं, बल्कि चर्चा करना है। उन्होंने कहा, “डिक्टेशन नहीं, डिस्कशन चाहिए। ऑर्डर्स नहीं, कंसेंसस होना चाहिए।” उनके मुताबिक परिवारों में संवाद की कमी चिंता का विषय है और इस दूरी को कम करना जरूरी है।
छात्र आंदोलन के बीच आया बयान
हालांकि मोहन भागवत ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
CJP का आंदोलन जारी
पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। सरकार अब तक इस मांग को स्वीकार नहीं कर रही है, हालांकि पेपर लीक पर सख्त कानून और अन्य सुधारों की घोषणा की जा चुकी है।
कपिल सिब्बल ने उठाए सवाल
मोहन भागवत की चुप्पी को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जंतर-मंतर की घटनाओं पर संघ प्रमुख की चुप्पी उनके भाषणों से ज्यादा प्रभावशाली रही।
आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार का दावा
वहीं, वरिष्ठ RSS नेता इंद्रेश कुमार ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के पीछे देश और विदेश की ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो भारत को मजबूत और विकसित राष्ट्र बनते नहीं देखना चाहतीं।
सरकार और CJP के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी है। अब सभी की नजर तीसरे दौर की वार्ता पर है, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार अपना रुख स्पष्ट कर सकती है।


