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ये पहली बार नहीं… 2023 से कई बार भूख हड़ताल पर बैठ चुके सोनम वांगचुक, कितनी बार पूरी हुई मांग?

Mintwire by Mintwire
18/07/2026
in देश
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एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 20 दिन से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. वांगुचक ने नीट पेपर लीक को लेकर ये हड़ताल शुरू की थी. उनकी मांग है कि एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें. 18 जुलाई को हंगर स्ट्राइक के 21वें दिन प्रोटेस्ट साइट पर काफी ज़्यादा हलचल मच गई. हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल ले गई. उनको सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया.

जिस समय प्रोटेस्ट साइट से उनको उठाया गया, वहां काफी ज़्यादा हंगामा मच गया. सफेद चादर में उनको ले जाया गया. अभिजीत दिपके ने इसको लेकर कई आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि वांगचुक को हटाए जाने की जानकारी मिलने के बाद जब वो जंतर-मंतर जा रहे थे, तब पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की. इन सब चीज़ों के बाद दिपके ने ऐलान किया है कि प्रोटेस्ट अभी जारी है.

अभिजीत दिपके भूख हड़ताल पर बैठे

अभिजीत दिपके ने खुद भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान कर दिया है. दिपके ने कहा कि 20 जुलाई का संसद चलो मार्च जारी रहेगा. ऐसा पहली बार नहीं है कि सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इससे पहले भी वो हंगर स्ट्राइक कर चुके हैं. चलिए जानते हैं कि कब-कब वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे और उसका रिज़ल्ट क्या हुआ.

साल 2023 से कभी पर्यावरण तो कभी एजुकेशन समेत कई मामलों को लेकर वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

जनवरी 2023: 5 दिन की हंगर स्ट्राइक

लद्दाख में जनवरी के कंपकंपाते महीने में सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे थे. इस आंदोलन में उनकी फिक्र पर्यावरण को लेकर थी. उन्होंने लद्दाख में खनन और फैक्ट्री जैसे प्रोजेक्ट्स से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर, इसको होने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी. इसी के साथ उन्होंने लद्दाख के लोगों के संवैधानिक सुरक्षा की भी मांग की थी. उन्होंने लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिर डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ मिलकर चार बड़ी मांगें रखीं.

इस प्रोटेक्स का नतीजा ये हुआ कि केंद्र सरकार ने एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाई थी. जिसने LAB और KDA के प्रतिनिधियों से कई दौर की बातचीत की. मगर आंदोलन की मुख्य मांगों पर कोई सहमति नहीं बन सकी थी.

चार मांगे:

1- लद्दाख को स्टेटहुड का दर्जा देना.
2- लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए.
3- लद्दाख के लिए अलग पब्लिक सर्विस कमीशन बनाया जाए.
4- लद्दाख को संसद और अन्य संस्थाओं में ज़्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जाए.

मार्च 2024: 21 दिन का क्लाइमेट फास्ट

6 मार्च 2024 को वांगचुक ने लेह में 21 दिन की हंगर स्ट्राइक की थी. उन्होंने इसको क्लाइमेट फास्ट कहा था. उन्होंने कहा था कि इस फास्ट का मकसद लद्दाख के पर्यावरण की सुरक्षा करने की तरफ ध्यान दिलाना था. इसको छठी अनुसूची में शामिल करने और स्टेट का दर्जा देने की मांग थी. इस फास्ट के दौरान सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

इसका नतीजा क्या हुआ?

सोनम वांगचुक ने पूरे 21 दिन के बाद 26 मार्च 2024 को अपना अनशन खत्म किया था. उन्होंने कहा था कि रिले भूख हड़ताल और शांति पूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा.

सितंबर-अक्तूबर 2024: दिल्ली चलो

वांगचुक और उनके 100 सपोर्टर्स ने मिलकर लद्दाख से दिल्ली चलो आंदोलन शुरू किया था. इस मार्च में भी लद्दाख को लेकर 4 मांग उठाई जा रही थी. जब 1 अक्तूबर को प्रोटेस्टर्स दिल्ली पहुंचे तो दिल्ली पुलिस ने वांगचुक और बाकी आंदोलनकारियों को डिटेन कर लिया था.

प्रदर्शनकारियों को डिटेन करने के बाद भी आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा था. केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच फिर से बातचीत हुई, लेकिन मुख्य मांगो पर कोई फैसला नहीं हुआ.

सितंबर 2025:

सितंबर 2025 में भी सोनम वांगचुक ने लद्दाख को लेकर हंगर स्ट्राइक शुरू की थी. 10 सितंबर 2025 को केंद्र सरकार से इन मामलों पर बातचीत के बाद कोई भी रिज़ल्ट न निकलने पर लेह एपेक्स बॉडी ने 35 दिनों का अनशन शुरू किया. सोनम वांगचुक भी इस अनशन में शामिल हुए. लेकिन, फिर इतने लंबे अनशन में लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद लेह में बड़े प्रदर्शन और बंद का आयोजन हुआ.

फिर जब हाई लेवल पर प्रदर्शन होने लगे तो फिर सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA के तहत हिरासत में ले लिया गया. वांगचुक की हिरासत का प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया. उन्होंने गुस्से में सरकार से अपनी मांगों को लेकर बातचीत भी नहीं की. फिर मार्च 2026 में NSA हटने के बाद वांगचुक रिहा हुए और केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत फिर से शुरू हुई.

नीट पेपर लीक

इसके बाद अब 28 जून को नीट पेपर लीक के मामले पर सोनम वांगचुक फिर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें. फिलहाल वांगचुक अस्पताल में हैं और उनका ट्रीटमेंट किया जा रहा है. उनसे जुड़ी हर अपडेट जानने के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए.

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