दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर मेट्रो स्टेशनों पर लगाई गई पाबंदियां हटा दी गई हैं. करीब 25 घंटे तक प्रभावित रहने के बाद 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट सेवा बहाल कर दी गई. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने शनिवार देर रात जानकारी दी कि अब पूरे मेट्रो नेटवर्क पर यात्रियों की आवाजाही सामान्य है. प्रभावित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा भी दोबारा शुरू कर दी गई है.
यह पाबंदी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए लगाई गई थी. इस दौरान सीजेपी के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था. वहीं, यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया. रविवार तक सभी को रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई.
25 घंटे तक बंद रहे मेट्रो स्टेशनों के गेट
दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर सुरक्षा कारणों से शुक्रवार रात 9 बजे मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद करने का फैसला लिया गया था. इसका उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान भीड़ को संवेदनशील इलाकों की ओर बढ़ने से रोकना था. शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गई थीं. बाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद प्रभावित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई.
इनमें राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, जनपथ, मंडी हाउस, आईटीओ, कश्मीरी गेट और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल थे.
इन स्टेशनों पर पाबंदियां शनिवार शाम 6 बजे हटाई जानी थीं, लेकिन समयसीमा चार घंटे बढ़ा दी गई. आखिरकार शनिवार रात 10 बजे के बाद प्रभावित स्टेशनों पर यात्रियों के लिए प्रवेश और निकास खोल दिया गया.
क्या रविवार को ट्रेनें रद्द रहेंगी?
रेलवे के मुताबिक, रविवार को ट्रेनें अपने निर्धारित समय के अनुसार चलेंगी. इससे पहले 9 और 10 अक्टूबर को कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया था और कुछ के समय में बदलाव किया गया था. रेलवे ने इन व्यवधानों के पीछे दो स्टेशनों के बीच सड़क यातायात में अचानक आई परेशानी का हवाला दिया था.
हालांकि, दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंच गया. याचिका में आरोप लगाया गया कि आम यात्रियों को परेशानी से बचाने के अदालत के निर्देशों के बावजूद कई मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए और नई दिल्ली तथा हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने-जाने वाली कई ट्रेनें रद्द की गईं.
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि यात्रियों को समय पर जानकारी देने के लिए जरूरी एडवाइजरी जारी नहीं की गई. अब अदालत संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कह रही है कि परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और पहले दिए गए निर्देशों का पालन हुआ या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट में हिरासत के मामले पर भी सुनवाई
मेट्रो और रेल सेवाओं से जुड़े मामले के अलावा, सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन से पहले विपक्षी नेताओं और अन्य लोगों को हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर भी याचिका दायर की गई है. इसमें चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत विपक्ष के कई नेताओं की एहतियाती हिरासत पर सवाल उठाए गए हैं.
अदालत के सामने यह मुद्दा भी है कि प्रदर्शन से पहले की गई इन हिरासतों की परिस्थितियों की जांच कैसे की जाए और संबंधित अधिकारियों से क्या जवाब मांगा जाए.
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए गए थे. इसके तहत मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश-निकास बंद करने और कुछ रेल सेवाओं में बदलाव किए जाने से आम यात्रियों को परेशानी हुई.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि लोगों को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन यह कानून के दायरे में होना चाहिए. साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सार्वजनिक परिवहन और अदालतों तक पहुंच को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए.
अब इस मामले में अदालत की सुनवाई और संबंधित अधिकारियों की अनुपालन रिपोर्ट पर नजर रहेगी. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मेट्रो और रेल सेवाओं पर पाबंदियां लगाने के फैसले तथा हिरासत की कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रशासन क्या जवाब देता है.


