उत्तर प्रदेश के लक्खीवाला गांव की बबीता रानी ने घर में खाना बनाते समय हर्बल टी तैयार करने का प्रयोग किया था. लेमन ग्रास में गिलोय, मुलेठी, कच्ची हल्दी, इलायची और सौंफ जैसी सामग्री मिलाकर उन्होंने एक नया मिश्रण तैयार किया. चाय का स्वाद पसंद आने के बाद उन्होंने इसकी पैकिंग कर बिक्री शुरू कर दी. धीरे-धीरे उनका यह प्रयोग एक कारोबार में बदलने लगा.
प्रधानमंत्री मोदी के जिक्र के बाद मिली पहचान
26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में विदुर प्रेरणा देशी हर्बल टी का जिक्र किया. इसके बाद चाय को देशभर में पहचान मिलने लगी. यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगाए गए स्टॉल पर इस हर्बल टी के लिए अजरबैजान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान से 1.40 लाख डॉलर के ऑर्डर मिले, जिनकी भारतीय मुद्रा में कीमत लगभग सवा करोड़ रुपये बताई गई है.
अब अपना निर्यात लाइसेंस बनवा रहा समूह
विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी से जुड़ा स्वयं सहायता समूह अब खुद अपने उत्पाद विदेश भेजने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए निर्यात लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है. यदि प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो यह जिले का पहला ऐसा स्वयं सहायता समूह बन सकता है, जो सीधे अपने उत्पादों का निर्यात करेगा.
ब्रिक्स सम्मेलन में भी परोसी गई हर्बल टी
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भी इस हर्बल टी को विदेशी मेहमानों के सामने परोसा गया. इसके 100 ग्राम के पैकेट पर 350 रुपये कीमत दर्ज है. समूह को घरेलू बाजार से भी ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ी हैं.
प्रशासन भी कर रहा महिलाओं की मदद
मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह के मुताबिक, समूह की महिलाएं लगातार अच्छा काम कर रही हैं और प्रशासन की ओर से उन्हें सहयोग दिया जा रहा है. उम्मीद है कि आने वाले समय में समूह को देश और विदेश से और ऑर्डर मिलेंगे.

