उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना की सरकारी आवासीय कॉलोनियों में हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही से कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा चिंता का विषय बन गई है। हाथियों के बार-बार रिहायशी क्षेत्र में पहुंचने से लोगों में दहशत का माहौल है। स्थिति को गंभीर मानते हुए सिंचाई विभाग ने कार्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) प्रशासन से तत्काल सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।
हाथियों के उत्पात से कर्मचारियों में डर
जानकारी के अनुसार, कार्बेट टाइगर रिजर्व से निकलकर हाथी लगातार रामगंगा बांध परियोजना की आवासीय कॉलोनियों में प्रवेश कर रहे हैं। हाथियों की मौजूदगी के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को हर समय खतरे का सामना करना पड़ रहा है। विभाग का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
CTR निदेशक को लिखा गया पत्र
शिविर प्रबंध खंड के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार ने कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है। पत्र में बताया गया है कि आवासीय कॉलोनी के दक्षिणी हिस्से में हाथियों के साथ-साथ बाघों की भी लगातार आवाजाही हो रही है। उन्होंने कहा कि जलविद्युत उत्पादन निगम के कार्यालय परिसर की तारबाड़ तोड़कर हाथी सिंचाई विभाग की कॉलोनी में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
वाहनों का भी पीछा कर रहे हाथी
विभाग ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि हाथियों का व्यवहार पहले की तुलना में अधिक आक्रामक होता जा रहा है। अब वे सड़क पर चल रहे वाहनों का भी पीछा कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि हाथियों को उत्तरी वन क्षेत्र में ही रोकने के लिए मजबूत और स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि वे रिहायशी इलाके तक न पहुंच सकें।
कर्मचारियों को जारी की गई चेतावनी
बढ़ते खतरे को देखते हुए कालागढ़ में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि यदि हाथी या बाघ रिहायशी क्षेत्र में दिखाई दें तो अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और वन विभाग के निर्देशों का पालन करें।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
कालागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी एन.के. रूवाली ने बताया कि रिहायशी क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग की गश्ती टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की किसी भी स्थिति को समय रहते रोका जाए। वन विभाग का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा उपायों की मांग तेज
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि हाथियों और अन्य वन्यजीवों की लगातार बढ़ती आवाजाही से सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, मजबूत बैरिकेडिंग और नियमित निगरानी बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।


