तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने जमानत पर रिहा होने के बाद मुख्यमंत्री विजय सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वह कोई आतंकवादी हों। स्टालिन ने दावा किया कि सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से उनके खिलाफ कार्रवाई की।
‘कोर्ट में गिरफ्तारी से इनकार, बाहर 3,000 पुलिसकर्मी तैनात’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट में सरकार की ओर से बताया गया था कि उन्हें गिरफ्तार करने का कोई इरादा नहीं है। इसके बावजूद पूछताछ के नाम पर करीब 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात कर उन्हें चेन्नई से तंजावुर सड़क मार्ग से ले जाया गया।
उन्होंने कहा, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं।”
‘सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है’
स्टालिन ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और सरकार इसे असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कहा, “सरकार ने मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया है। मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा, जैसा आरोप लगाया जा रहा है।”
‘महिलाओं का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था’
उदयनिधि स्टालिन ने स्पष्ट किया कि उनका महिलाओं का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।
उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी, बेटी और बहन हैं। तमिलनाडु की सभी महिलाएं मेरे लिए मां और बहन के समान हैं। मैं कभी महिलाओं का अपमान नहीं कर सकता।”
क्या है पूरा मामला?
उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित डीएमके के एक प्रदर्शन के दौरान दिए गए कथित “डबल मीनिंग” बयान को लेकर मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी टिप्पणी अभिनेता त्रिशा की ओर इशारा करती थी और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।
हालांकि, स्टालिन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें स्टेशन बेल पर रिहा कर दिया।


