प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला IIT बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में शिक्षक हैं और एक दशक से ज्यादा समय से संस्थान से जुड़े हुए हैं. उनकी विशेषज्ञता पावर सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में है.
डूला ने 2000 में नागार्जुन विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद 2002 में IIT बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम इंजीनियरिंग में एमटेक और 2007 में IIT दिल्ली से पावर सिस्टम में पीएचडी की. IIT बॉम्बे से जुड़ने से पहले उन्होंने बेंगलुरु की पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स और हैदराबाद की मशीन 2 मशीन में काम किया था.
साहिल वाकोडे की मौत के बाद चर्चा में आए
18 सितंबर 2026 को IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद प्रोफेसर डूला का नाम चर्चा में आया. IIT बॉम्बे के अनुसार, वाकोडे को मध्य-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था. संस्थान के मुताबिक, उन्होंने प्रश्नपत्र की तस्वीर एक एआई मंच पर डालकर जवाब लेने की कोशिश भी की थी.
डूला उस परीक्षा के पाठ्यक्रम शिक्षक और निगरानीकर्ता थे. उन्होंने कथित परीक्षा अनियमितता की जानकारी संस्थान के अधिकारियों को दी थी. IIT बॉम्बे का कहना है कि इसके बाद छात्र की शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने काउंसलिंग की थी और उन्हें बताया गया था कि इस घटना का उनके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. संस्थान के अनुसार, उनकी मौत से पहले उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं हुई थी.
परिवार ने लगाए उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप
साहिल के परिवार ने डूला समेत संस्थान से जुड़े लोगों पर उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं. परिवार की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. डूला का नाम भी शिकायत में शामिल है. इन आरोपों की जांच अभी जारी है.
छात्र प्रदर्शन के बाद हुए निलंबित
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे परिसर में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया और डूला के खिलाफ कार्रवाई समेत कई मांगें रखीं. 20 सितंबर को IIT बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और 18 मांगों वाले पत्र पर हस्ताक्षर किए. इन मांगों में डूला के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल थी.
इसके बाद 20 सितंबर की शाम IIT बॉम्बे ने डूला को निलंबित कर दिया. वहीं, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने डूला का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने परीक्षा निगरानीकर्ता के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई और कथित परीक्षा अनियमितता सामने आने के बाद संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया.
IIT बॉम्बे में निभा चुके हैं कई जिम्मेदारियां
डूला केवल शिक्षण और शोध तक सीमित नहीं रहे हैं. वह IIT बॉम्बे के हॉस्टल-6 के वार्डन और बाद में छात्र मामलों के डीन भी रह चुके हैं. वह JEE Advanced, UCEED और CEED जैसी प्रमुख परीक्षाओं के आयोजन से भी जुड़े रहे हैं.
उन्हें 2021 में प्रोफेसर एसपी सुखात्मे उत्कृष्ट शिक्षण पुरस्कार और 2017 में IIT बॉम्बे उत्कृष्ट शिक्षण पुरस्कार मिला था. 2009 में उन्हें युवा संकाय पुरस्कार भी मिला था. उनका शोध स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, वितरित ऊर्जा संसाधन, बिजली व्यवस्था के संचालन और नियंत्रण तथा ऊर्जा दक्षता जैसे विषयों पर केंद्रित रहा है.
फिलहाल क्या है स्थिति?
21 सितंबर तक डूला IIT बॉम्बे से निलंबित हैं. उनके खिलाफ लगाए गए आरोप और उनकी आपराधिक जिम्मेदारी का सवाल अलग-अलग विषय हैं और साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े मामले में पुलिस की जांच जारी है.
इस पूरे मामले में तीन अलग-अलग पहलू हैं—परीक्षा के दौरान हुई कथित अनियमितता, साहिल के परिवार की ओर से लगाए गए उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप तथा उसके बाद शुरू हुआ छात्र प्रदर्शन और संस्थान की ओर से की गई कार्रवाई.


