नई दिल्ली: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ बाजार में चीनी महंगी हो रही है, तो दूसरी तरफ ग्राहकों को इसकी खरीद पर भी लिमिट का सामना करना पड़ रहा है। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto, Blinkit और Swiggy Instamart ने कुछ चीनी उत्पादों पर प्रति ऑर्डर खरीद की सीमा तय कर दी है।
त्योहारों के दौरान घरों में मिठाई और पारंपरिक पकवान बनाने के लिए चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खरीदारी पर लगी सीमा का असर उन परिवारों पर ज्यादा पड़ सकता है, जो पहले से चीनी का स्टॉक करना चाहते हैं।
Zepto, Blinkit और Swiggy पर कितनी लिमिट?
क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अलग-अलग चीनी उत्पादों के लिए अलग-अलग खरीद सीमा दिखाई दे रही है।
Zepto पर कुछ चीनी पैक्स की खरीद पर लिमिट लगाई गई है। ऐप पर कुछ उत्पादों के लिए सीमित उपलब्धता का संकेत भी दिया जा रहा है।
Blinkit पर भी कुछ चीनी पैक्स के लिए ग्राहक कितनी मात्रा खरीद सकते हैं, इसकी सीमा तय की गई है।
वहीं, Swiggy Instamart पर Supreme Harvest Crystal Sugar के एक लिस्टिंग में 1 किलो के अधिकतम 2 पैकेट प्रति ऑर्डर खरीदने की सीमा दिखाई दी।
ऑफलाइन दुकानों पर भी खरीद सीमित
चीनी की खरीद पर रोक सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, DMart और Reliance जैसी बड़ी ऑफलाइन रिटेल चेन के कुछ स्टोर्स में भी ग्राहकों के लिए करीब 2 से 3 किलो तक चीनी खरीदने की सीमा तय की गई है।
यानी ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर करें या सुपरमार्केट से खरीदारी करें, दोनों जगह कुछ मामलों में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदना आसान नहीं है।
त्योहारों से पहले क्यों बढ़ रही चीनी की कीमत?
त्योहारों के दौरान चीनी की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। घरों के अलावा मिठाई की दुकानें, बेकरी और अन्य फूड बिजनेस भी ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदते हैं।
इसी बीच घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। कीमतों और सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की दी अनुमति
सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी को ड्यूटी-फ्री आयात करने की अनुमति दी है। पहले आयातकों को कच्ची चीनी को रिफाइंड कर 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचने की शर्त थी।
अब नियमों में बदलाव करते हुए आयातकों को Bill of Entry दाखिल करने की तारीख से दो महीने तक का समय दिया गया है, ताकि वे कच्ची चीनी को रिफाइंड कर घरेलू बाजार में बेच सकें।
सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाना और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर लगाम लगाना है।
आम ग्राहकों पर कितना असर?
अगर कोई ग्राहक रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए एक-दो पैकेट चीनी खरीदता है, तो मौजूदा लिमिट का असर ज्यादा महसूस नहीं होगा। लेकिन त्योहारों के लिए मिठाई और पकवान बनाने वाले परिवारों या ज्यादा मात्रा में खरीदारी करने वालों के लिए यह परेशानी बढ़ा सकती है।
सरकार की ओर से अतिरिक्त चीनी बाजार में पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि नई सप्लाई से कीमतों में कितनी राहत मिलती है और रिटेल स्तर पर लगी खरीद सीमा कब तक हटती है।
फिलहाल उपभोक्ताओं के सामने दोहरी चुनौती है—चीनी महंगी हो रही है और कई जगह ज्यादा मात्रा में खरीदने पर भी रोक लगी है।


