पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी 37 लाख से ज्यादा अपीलें अभी लंबित हैं. मौजूदा रफ्तार से इन सभी मामलों के निपटारे में करीब 12 साल लग सकते हैं. इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से अपीलों की सुनवाई के लिए और अधिक ट्रिब्यूनल बनाने की मांग की है.
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि अप्रैल के मध्य से ट्रिब्यूनल ने 1,26,194 अपीलों का निपटारा किया है. 16 सितंबर तक कुल 37,05,235 अपीलें लंबित थीं. मौजूदा रफ्तार से सातों दिन काम करने पर भी इन मामलों को निपटाने में करीब 146 महीने यानी 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है.
42 लोकसभा क्षेत्रों में एक-एक ट्रिब्यूनल का प्रस्ताव
आयोग ने लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए पश्चिम बंगाल के सभी 42 लोकसभा क्षेत्रों में एक-एक ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव दिया है. आयोग के अनुसार, SIR से जुड़े फैसलों के खिलाफ कुल 38.31 लाख अपीलें दायर की गई हैं. इनमें 22.21 लाख अपीलें उन लोगों की हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए और वे नाम दोबारा जोड़ने की मांग कर रहे हैं. वहीं 16.10 लाख अपीलें मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ हैं.
1 लाख से ज्यादा नाम दोबारा जुड़े
ट्रिब्यूनल द्वारा अब तक निपटाई गई 1,26,194 अपीलों में से 1,13,943 मामलों में आवेदकों के नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ दिए गए. यानी अब तक निपटाई गई अपीलों में 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में नाम बहाल किए गए हैं.
चुनाव नतीजों पर असर के दावे को EC ने बताया गलत तरीका
चुनाव आयोग ने उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि SIR के दौरान हटाए गए नामों की संख्या कई विधानसभा क्षेत्रों में जीत के अंतर से ज्यादा थी और इसका चुनाव नतीजों पर असर पड़ा.
आयोग ने कहा कि ऐसे दावों में “अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे” नामों की श्रेणी को नजरअंदाज किया गया है. आयोग ने जीत के अंतर और हटाए गए नामों की संख्या की तुलना को “त्रुटिपूर्ण और अटकलों पर आधारित पैमाना” बताया. आयोग ने यह भी कहा कि कुछ ऐसे विधानसभा क्षेत्र भी हैं, जहां TMC उम्मीदवार जीते, जबकि हटाए गए नामों की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी.
अभी 19 ट्रिब्यूनल कर रहे सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 19 ट्रिब्यूनल गठित किए थे. इनकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सौंपी गई है. इसके अलावा SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को भी तैनात किया गया है.


