शादी की तारीख बदलने के बाद एडवांस रकम वापस नहीं करना होटल और इवेंट आयोजक को भारी पड़ गया. मामला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग पहुंचा, जहां आयोग ने होटल और इवेंट आयोजक को सेवा में कमी का जिम्मेदार माना. आयोग ने दोनों को ब्याज समेत रकम लौटाने और मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है.
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम और सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने मामले में होटल के खिलाफ परिवाद को आंशिक रूप से और इवेंट आयोजक के खिलाफ एकपक्षीय रूप से स्वीकार किया.
होटल को 1.25 लाख पर देना होगा ब्याज
आयोग के आदेश के मुताबिक, होटल को 1 लाख 25 हजार रुपये की रकम पर परिवाद दाखिल करने की तारीख से भुगतान होने तक 8 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज देना होगा.
वहीं, इवेंट आयोजक को 25 हजार रुपये पर इसी दर से ब्याज देना होगा. इसके अलावा दोनों विपक्षी पक्षों को अलग-अलग 10 हजार रुपये आर्थिक एवं मानसिक क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपये वाद व्यय भी देना होगा.
आयोग ने दोनों को यह भुगतान आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर करने का निर्देश दिया है.
2016 में कराई थी शादी की बुकिंग
मामला एडीए कॉलोनी, नैनी निवासी स्वाति मिश्रा का है. उन्होंने सिविल लाइंस के ताशकंद मार्ग स्थित इलाहाबाद रिजेंसी और श्री गणेश इवेंट ऑर्गेनाइजेशन के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया था.
परिवाद के मुताबिक, स्वाति ने अपनी शादी के लिए होटल में 28 नवंबर 2016 की बुकिंग कराई थी. इसके लिए होटल के खाते में 1.25 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे. होटल की संस्तुति पर इवेंट आयोजन के लिए 25 हजार रुपये नकद भी दिए गए.
बाद में अपरिहार्य कारणों से शादी की तारीख बदलकर 3 दिसंबर 2016 हो गई. स्वाति ने इसकी जानकारी होटल और इवेंट आयोजक को दी और एडवांस रकम को नई तारीख के लिए समायोजित करने का अनुरोध किया.
आरोप है कि रकम नई तारीख के लिए समायोजित नहीं की गई और वापस मांगने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया. इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा.
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नोएडा पुलिस की हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- पुलिस की हालत बेहद खराब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर ली. कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के उस तरीके पर नाराजगी जताई, जिसके तहत व्यक्ति को हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार किया गया था.
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने गौतम बुद्ध नगर के सहायक पुलिस आयुक्त और थाना प्रभारी से कड़ी मौखिक टिप्पणी की.
पुलिस अधिकारियों को लगाई फटकार
खंडपीठ ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य में पुलिस की हालत बेहद खराब है.
अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को लगता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं और उसके बाद बच निकलेंगे. कोर्ट ने हिरासत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई.
मामले में हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस की कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है.


