शनिवार सुबह इजरायल ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया. इजरायली सेना के प्रवक्ता के अनुसार यह हमला पहले से योजना बनाकर किया गया था और इसका उद्देश्य इजरायल के खिलाफ संभावित खतरों को खत्म करना था. अमेरिका और इजरायल के कई मीडिया संस्थानों ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना के साथ समन्वय भी किया गया.
हमले के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान के मध्य इलाके में कई जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई. रिपोर्ट के अनुसार एक हमला ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास भी हुआ. इससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया.
परमाणु कार्यक्रम बातचीत पर ट्रंप ने जताई थी नाराज़गी
यह हमला ऐसे समय हुआ जब कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा था कि वे मौजूदा वार्ता से संतुष्ट नहीं हैं. पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने भी मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी थी, जिसमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और कई युद्धपोत तैनात किए गए थे.
इजरायली सेना के प्रवक्ता क्या कहा?
इजरायली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि यह एक “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” यानी पहले से किया गया हमला था, ताकि इजरायल की सुरक्षा को खतरे से बचाया जा सके. हमले के तुरंत बाद इजरायल ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया और पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया. सरकार को आशंका है कि ईरान इस हमले के जवाब में ड्रोन और मिसाइल हमले कर सकता है.
मध्य पूर्व में इस घटना के बाद तनाव काफी बढ़ गया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जवाबी कार्रवाई होती है, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है.


