उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। लखनऊ में मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे जर्जर स्कूल भवनों के वीडियो को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कई वीडियो में दिखाए जा रहे भवन वर्ष 2017 से पहले के हैं और सरकार ऐसे पुराने व जर्जर भवनों को चिह्नित कर नए भवनों से बदलने का काम कर रही है।
SP सरकार पर कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को लेकर साधा निशाना
सीएम योगी ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में प्रदेश की कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था खराब स्थिति में थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में गरीबों की जमीन पर कब्जे, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और लगातार होने वाले दंगों के कारण लोगों में असुरक्षा का माहौल था।
उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद प्रदेश में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और सरकार विकास तथा कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
जर्जर स्कूलों के वीडियो पर CM Yogi का पलटवार
सोशल मीडिया पर स्कूलों की खराब हालत से जुड़े वीडियो सामने आने को लेकर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इनमें से कई जर्जर भवन पिछली सरकार के समय के हैं।
सीएम योगी के मुताबिक सरकार पुराने और असुरक्षित स्कूल भवनों की पहचान कर उन्हें नए भवनों से बदल रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बच्चों के लिए सुविधाजनक पढ़ाई का माहौल तैयार करने पर लगातार काम किया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार, बाल वाटिका, आईसीटी लैब और अन्य सुविधाओं के जरिए सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गर्मी और सर्दी जैसी मुश्किल परिस्थितियों में स्कूल जाना पड़ता था। अब सरकार की ओर से विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे और स्वेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
परीक्षा व्यवस्था में नकल पर रोक का दावा
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था में नकल पर प्रभावी नियंत्रण किया गया है और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में काम जारी है।
‘बबुआ’ वाले बयान से अखिलेश यादव पर निशाना
बिना नाम लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर भी सीएम योगी ने निशाना साधा। उन्होंने ‘बबुआ’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि सरकार चलाने के लिए समय और मेहनत दोनों जरूरी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन और अलग-अलग विभागों के कामकाज की लगातार समीक्षा करती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग दोपहर में उठते हैं, शाम को जिम जाते हैं और फिर पार्टी करते हैं, उनके पास प्रदेश के लिए समय नहीं होता।
3.53 लाख स्कूल रसोइयों के लिए चार बड़े ऐलान
सीएम योगी ने PM Poshan Yojana के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में काम कर रहे 3.53 लाख रसोइयों के लिए चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
• रसोइयों का मासिक मानदेय बढ़ाकर ₹3,000 किया जाएगा। • दुर्घटना की स्थिति में ₹2 लाख की सहायता मिलेगी। • प्रत्येक रसोइए के परिवार को हर साल ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। • कपड़ों के लिए मिलने वाली मौजूदा राशि को दोगुना किया जाएगा।
11 रसोइयों को दिए कैशलेस मेडिकल कार्ड
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से 11 रसोइयों को कैशलेस मेडिकल कार्ड वितरित किए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 1,500 रसोइयों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा जिलों और तहसील स्तर पर भी रसोइयों के सम्मान के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए।
रसोइयों के लिए खुलेगा बैंक खाता, सीधे खाते में आएगा मानदेय
सीएम योगी ने कहा कि अब तक रसोइयों के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। सरकार उनके बैंक खाते खुलवाकर मानदेय सीधे खातों में भेजेगी।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना होने पर परिवार को ₹2 लाख की सहायता दी जाएगी, जबकि बीमारी की स्थिति में परिवार के सदस्य सूचीबद्ध अस्पतालों में हर साल ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज करा सकेंगे।
बच्चों के पोषण में रसोइयों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में रसोइयों की जिम्मेदारी सिर्फ खाना बनाने और बच्चों को भोजन परोसने तक सीमित नहीं है। वे बच्चों को योजना के अनुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनके स्वस्थ बचपन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर विशेष जोर
सीएम योगी ने मिड-डे मील की तैयारी के दौरान साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि रसोई में अनधिकृत लोगों के प्रवेश को रोका जाना चाहिए और भोजन की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए, ताकि फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं की संभावना को रोका जा सके।
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