इस मानसून राजधानी दिल्ली में बारिश का आंकड़ा उम्मीद से बेहतर रहा। 16 सितंबर तक दिल्ली में सामान्य से 8% ज्यादा बारिश दर्ज की गई। खास बात यह है कि दिल्ली के आसपास के कई इलाकों में इसके उलट सामान्य से कम बारिश हुई।
पड़ोसी जिलों में बारिश का आंकड़ा कम
दिल्ली के उत्तर में सोनीपत में बारिश सामान्य से 32% कम, जबकि रोहतक में 47% कम रही। पंजाब के होशियारपुर में 53% और कपूरथला में 69% कम बारिश दर्ज की गई। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी यूपी के 30 से ज्यादा जिलों में भी बारिश सामान्य से कम रही।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम ने बदली दिशा
मौसम के इस अलग पैटर्न के पीछे बंगाल की खाड़ी से बनने वाले कम दबाव वाले सिस्टम की भूमिका मानी जा रही है। इस साल कई सिस्टम सामान्य रास्ते से अलग उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़े और दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों तक पहुंचे।
अगस्त में दिल्ली पर खास मेहरबान रहा मानसून
अगस्त में छह लो प्रेशर सिस्टम ने देश को प्रभावित किया, जिनमें दो डिप्रेशन भी शामिल थे। इनमें से कई सिस्टम ओडिशा, बंगाल और झारखंड से होते हुए यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली की ओर बढ़े, जबकि राजस्थान, हरियाणा और पंजाब पर इनका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा।
अल नीनो का भी दिख सकता है असर
2024 की ‘क्लाइमेट डायनामिक्स’ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक 1979-2020 के दौरान अल नीनो वाले वर्षों में बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन की औसत संख्या सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक रही। सामान्य वर्षों में जुलाई-अगस्त में औसतन 2.4 डिप्रेशन की तुलना में अल नीनो वाले वर्षों में यह आंकड़ा 3.9 रहा।
इस साल बने 10 कम दबाव वाले सिस्टम
इस साल अब तक 10 कम दबाव वाले सिस्टम बने, जिनमें जुलाई-अगस्त के दौरान चार डिप्रेशन शामिल रहे। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो की स्थिति में इन सिस्टम की दिशा और प्रभाव के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने भी बढ़ाई बारिश
दिल्ली में ज्यादा बारिश की एक अन्य वजह मानसून सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (WD) का एक साथ सक्रिय होना रही। इस साल जून से अगस्त के बीच 16 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आए, जिनमें आठ अगस्त में ही आए।
जब दोनों सिस्टम मिले, जमकर बरसे बादल
दिल्ली में 8-9 जुलाई, 29 जुलाई, 7-8 अगस्त और 25 अगस्त को सबसे ज्यादा बारिश उन मौकों पर हुई, जब मानसून सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दोनों सक्रिय थे। इन सिस्टम के मेल से पश्चिमी यूपी में भी भारी बारिश हुई और पहाड़ी इलाकों में कई जगह अचानक बाढ़ व अन्य घटनाएं देखने को मिलीं।
जलवायु परिवर्तन से भी जुड़ा हो सकता है पैटर्न
वैज्ञानिकों के मुताबिक हाल के वर्षों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से जुड़ी जेट स्ट्रीम के सामान्य समय से देर तक बने रहने का रुझान देखा गया है। इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, दिल्ली में इस साल सामान्य से अधिक बारिश के पीछे अल नीनो, मानसून सिस्टम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस—इन सभी कारकों की भूमिका को अलग-अलग समझना जरूरी है।

