मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘एक जेल, एक उत्पाद’ पहल के तहत पौड़ी जिला कारागार में बंदियों को पिरुल से हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में यह 21 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
पिरुल से तैयार हो रहे आकर्षक उत्पाद
जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से दिए गए प्रशिक्षण में बंदियों को पिरुल की पत्तियों को प्रसंस्कृत कर घरेलू सजावट के सामान बनाने की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बंदी खुद इन उत्पादों को तैयार कर रहे हैं।
सजा के बाद आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य
जिला कारागार अधीक्षक कौशल सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को उपयोगी कौशल से जोड़ना है, ताकि सजा पूरी होने के बाद वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।
अनुपयोगी पिरुल बना रोजगार का जरिया
जंगलों में अक्सर अनुपयोगी समझी जाने वाली पिरुल की पत्तियां अब बंदियों के लिए हुनर और रोजगार का माध्यम बन रही हैं। इससे तैयार सजावटी उत्पाद स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ उनके लिए नई शुरुआत की संभावनाएं भी तैयार कर रहे हैं।

