उत्तर प्रदेश की अपराध की दुनिया में कई ऐसे नाम रहे, जिन्होंने दशकों तक अपने आतंक और दबदबे से सुर्खियां बटोरीं। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्टर वायरल हो रहा है, जिसमें यूपी के चार सबसे चर्चित गैंगस्टरों—श्रीप्रकाश शुक्ला, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और विकास दुबे—का जिक्र किया गया है। हालांकि यह कोई आधिकारिक रैंकिंग नहीं है, लेकिन इन चारों के नाम लंबे समय तक प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अपराध की चर्चाओं का हिस्सा रहे।
श्रीप्रकाश शुक्ला
1990 के दशक में पूर्वांचल के सबसे खौफनाक अपराधियों में गिने जाने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला पर हत्या, रंगदारी और अपहरण जैसे कई गंभीर आरोप लगे। साल 1998 में यूपी एसटीएफ ने मुठभेड़ में उसे मार गिराया था।
अतीक अहमद
प्रयागराज का रहने वाला अतीक अहमद अपराध की दुनिया से राजनीति तक पहुंचा। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी और जमीन कब्जाने समेत कई संगीन मामले दर्ज रहे। अप्रैल 2023 में प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच अतीक और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
मुख्तार अंसारी
गाजीपुर के रहने वाले मुख्तार अंसारी पर हत्या, रंगदारी, ठेकेदारी और गैंग संचालन जैसे कई मामले दर्ज रहे। वह कई बार विधायक भी चुना गया। मार्च 2024 में जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई थी।
विकास दुबे
कानपुर के बिकरू गांव का रहने वाला विकास दुबे वर्ष 2020 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया, जब उसके गिरोह ने पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। घटना के कुछ दिनों बाद पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।
अपराध से राजनीति तक का सफर
इन चारों नामों की कहानी केवल अपराध तक सीमित नहीं रही। इनमें से अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी सक्रिय राजनीति में भी रहे और चुनाव जीतकर विधानसभा तथा संसद तक पहुंचे। वहीं श्रीप्रकाश शुक्ला और विकास दुबे अपने गैंग और आपराधिक घटनाओं के कारण चर्चाओं में रहे।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट
इन चारों अपराधियों को लेकर सोशल मीडिया पर एक इन्फोग्राफिक तेजी से साझा किया जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि “यूपी के टॉप 4 गैंगस्टर” जैसी सूची किसी सरकारी या आधिकारिक एजेंसी द्वारा जारी रैंकिंग नहीं है, बल्कि सार्वजनिक चर्चाओं और चर्चित मामलों के आधार पर बनाई गई प्रस्तुति है।
नोट: यह खबर केवल सार्वजनिक रूप से चर्चित आपराधिक मामलों और ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी भी अपराधी या आपराधिक गतिविधि का महिमामंडन करना नहीं है।


