बिजली गुल होने से ऑक्सीजन सेवा भी हुई प्रभावित. परिजनों में मचा हड़कंप, अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर उठे सवाल
बिहार के मुंगेर स्थित मॉडल सदर अस्पताल में गुरुवार रात बिजली गुल होने के बाद इमरजेंसी वार्ड करीब 45 मिनट तक अंधेरे में डूबा रहा. इस दौरान डॉक्टरों को मरीजों का इलाज और पर्ची लिखने के लिए मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट का सहारा लेना पड़ा. बिजली आपूर्ति ठप होने से ऑक्सीजन सेवा प्रभावित होने का भी आरोप लगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में हड़कंप मच गया.
मोबाइल की रोशनी में हुआ इलाज
प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल कर्मचारियों के मुताबिक, अचानक बिजली जाने से इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी मच गई. डॉक्टर अंधेरे में मरीजों की जांच नहीं कर पा रहे थे और परिजन अपने मरीजों को हाथ से पंखा झलते नजर आए.
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर राजीव रोशन मोबाइल की फ्लैशलाइट की मदद से मरीजों की जांच करते और दवाइयां लिखते दिखाई दिए.
ऑक्सीजन सेवा प्रभावित होने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि बिजली जाने के दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट पर मौजूद कई मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि बिजली कटने से ऑक्सीजन सेवा भी प्रभावित हुई, जिससे गंभीर मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई.
बैकअप सिस्टम पर उठे सवाल
घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन बैकअप व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल सूत्रों के अनुसार, भवन निर्माण के समय इनवर्टर लगाए गए थे, लेकिन आज तक उन्हें बिजली व्यवस्था से नहीं जोड़ा गया.
परिजनों ने जताई नाराजगी
बेलन बाजार निवासी राघव कुमार ने बताया कि करीब आधे घंटे तक बिजली नहीं रही और अस्पताल प्रशासन को कई बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला.
वहीं हवेली खड़गपुर के परसंडो गांव से आए एक गंभीर मरीज के परिजनों ने कहा कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे मरीज को निजी अस्पताल ले जाने पर मजबूर होंगे.
डॉक्टर बोले- अंधेरे में इलाज करना बेहद मुश्किल
ड्यूटी डॉक्टर राजीव रोशन ने बताया कि बिजली करीब 45 मिनट तक नहीं थी.
उन्होंने कहा, “अंधेरे में मरीजों की जांच करना और दवाइयां लिखना बेहद कठिन हो गया था. फिलहाल मोबाइल की फ्लैशलाइट की मदद से काम करना पड़ा. इस बिजली कटौती से मरीजों के साथ-साथ अस्पताल स्टाफ को भी काफी दिक्कत हुई और ऑक्सीजन सेवाएं भी प्रभावित हुईं.”
सिविल सर्जन ने मांगी रिपोर्ट
घटना पर सिविल सर्जन डॉ. राजू ने कहा कि उन्हें वायरल वीडियो की जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि यदि इमरजेंसी वार्ड में इतनी देर तक बिजली नहीं रही है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मामले की जानकारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक और अस्पताल प्रबंधक से ली जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में इनवर्टर से बैकअप मिलना चाहिए था.
इस घटना के बाद जिले के प्रमुख सरकारी अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों और बैकअप व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.


