Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कंपनी के प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन में हुई कमियों के लिए माफी मांगी. सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक में Meta के अधिकारियों से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर कड़े सवाल पूछे गए.
सरकार ने Safe Harbour पर उठाए सवाल
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने साफ कहा कि Meta अपने एल्गोरिदम के जरिए यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा. ऐसे में कंपनी खुद को केवल ‘इंटरमीडियरी’ बताकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली Safe Harbour सुरक्षा का दावा नहीं कर सकती.
कंटेंट प्रमोशन को लेकर भी जताया अफसोस
बैठक के दौरान Meta ने माना कि कुछ तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने पर कंपनी ने बड़ी रकम खर्च की थी. कंपनी ने कंटेंट मॉडरेशन में हुई गलतियों और हानिकारक कंटेंट के प्रबंधन को लेकर भी खेद व्यक्त किया. अधिकारियों के साथ इस विषय पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है.
PM मोदी के वीडियो का भी उठा मुद्दा
इससे पहले संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा था कि Meta को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ घंटों के लिए हटाने के मामले में व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए. सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने बैठक में इस मुद्दे के साथ-साथ CSAM पर प्रभावी कार्रवाई न होने को लेकर भी चिंता जताई.


