प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पहली बार किसी बड़े छात्र आंदोलन ने ऐसा असर दिखाया कि सरकार को अपनी सबसे बड़ी मांगों में से एक माननी पड़ी. NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जाकर खत्म हुआ. कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर धरना, संसद मार्च और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
शुक्रवार को केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए कई बड़े फैसलों का ऐलान किया था. इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को हटाना, एनटीए में सुधार, शिक्षा सचिव का तबादला, पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान शामिल था. हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मुख्य मांग—शिक्षा मंत्री के इस्तीफे—पर अड़े रहे और आखिरकार सरकार ने यह मांग भी स्वीकार कर ली.
मोदी सरकार में इस्तीफा देने वाले दूसरे मौजूदा केंद्रीय मंत्री बने धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जनता के दबाव में पद छोड़ने वाले वह दूसरे मौजूदा केंद्रीय मंत्री हैं. इससे पहले अक्टूबर 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था.
ओडिशा से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद संभाला था. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें दोबारा इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
NEET-UG 2026 पेपर लीक से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के कथित पेपर लीक से हुई. आरोपों के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई. इस बीच परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया से पैदा हुए तनाव के कारण 12 छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के दावे ने पूरे देश में आक्रोश बढ़ा दिया.
इसी दौरान 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद “कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)” नाम से एक आंदोलन शुरू हुआ. इसके बैनर तले 6 जून से देशभर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही और इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गए.
जंतर-मंतर का धरना बना आंदोलन का केंद्र
देशभर में अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों के बाद 20 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. धीरे-धीरे यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया और बड़ी संख्या में छात्र इसमें शामिल होने लगे.
28 जून को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए. 18 जुलाई को स्वास्थ्य बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई. बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया. 23 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया.
20 जुलाई की कार्रवाई के बाद और तेज हुआ आंदोलन
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने “चलो संसद” मार्च का आह्वान किया. संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए. इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी.
कुछ प्रदर्शनकारियों ने पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन दावों से इनकार करते हुए कहा कि उसके पास ऐसी कोई गन नहीं है और विरोध प्रदर्शनों में उनका इस्तेमाल नहीं किया जाता.
CJP की प्रमुख मांगें
आंदोलन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी. इसके अलावा संगठन राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने, प्रभावित छात्रों और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग कर रहा था.
Gen-Z आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में NEET समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र शामिल हुए. Gen-Z युवाओं के अलावा अभिभावकों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के कई लोगों ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया. विपक्षी दलों के नेताओं ने भी आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई.
सरकार के फैसलों के बाद भी नहीं थमे प्रदर्शन
सरकार ने शुरुआत में सख्त रुख अपनाया और बाद में परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई फैसले किए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और पेपर लीक मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा भी की. इसके बावजूद प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम रहे.
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और CJP समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई. प्रदर्शनकारी नाचते-गाते नजर आए. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताते हुए कहा कि युवाओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और सरकार को उनकी मांग माननी पड़ी.


