नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, कथित पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं. 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद आंदोलन और तेज हो गया.
पीएम मोदी ने किया फास्ट-ट्रैक कोर्ट का ऐलान
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई कर दोषियों को कठोर दंड दिलाने की व्यवस्था की जाएगी.
क्या फास्ट-ट्रैक कोर्ट से मिलेगा समाधान?
सरकार के इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या फास्ट-ट्रैक कोर्ट वास्तव में पेपर लीक जैसे मामलों का प्रभावी समाधान साबित होंगे. संसद में केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक देशभर की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) में 2,45,579 मामले लंबित थे. वहीं, 30 अप्रैल 2026 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित हो रही थीं. इनमें POCSO मामलों की सुनवाई के लिए 398 विशेष अदालतें भी शामिल हैं.
अब तक कितने मामलों का हुआ निस्तारण?
डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के मुताबिक, अक्टूबर 2019 में शुरू हुई फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट अब तक 3,66,124 मामलों का निपटारा कर चुकी हैं. हालांकि इसके बावजूद इन अदालतों में अब भी 2.45 लाख से अधिक मामले लंबित हैं.
क्या होती हैं फास्ट-ट्रैक कोर्ट?
फास्ट-ट्रैक कोर्ट की अवधारणा सबसे पहले वर्ष 2000 में 11वें वित्त आयोग ने दी थी, ताकि जिला और अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सके. बाद में 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2019 में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की शुरुआत की. इनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करना था.
जंतर-मंतर आंदोलन कैसे हुआ तेज?
NEET पेपर लीक के विरोध में 28 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू हुआ, जहां सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे. बाद में दिल्ली पुलिस उन्हें स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल ले गई, जिसके बाद आंदोलन और तेज हो गया. इसके बाद Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके भी भूख हड़ताल पर बैठ गए.
20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के लिए हजारों प्रदर्शनकारी जुटे. दिल्ली पुलिस ने धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए प्रदर्शन रोकने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई को अत्यधिक बल प्रयोग बताया. कुछ लोगों ने पैलेट गन इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसके पास ऐसी कोई गन नहीं है और विरोध प्रदर्शनों में उनका इस्तेमाल नहीं किया जाता.
सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत
24 जुलाई को CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से दूसरी बार मुलाकात की. बैठक में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे. करीब दो घंटे चली बातचीत में सरकार ने कथित तौर पर दो मांगों—NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर व अन्य कानूनी कार्रवाई वापस लेने—पर सहमति जताई. वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने शनिवार दोपहर तक अपना जवाब देने की बात कही.


