जिले में लगातार बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए अब प्रशासन ने ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है. एक महीने की ग्राउंड स्टडी के बाद एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल ने बड़े महानगरों की तर्ज पर नया ट्रैफिक मैनेजमेंट मॉडल लागू करने की योजना बनाई है.
इस नई व्यवस्था के तहत शहर के प्रमुख स्थानों पर छह हाईटेक ट्रैफिक स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. इन स्टेशनों पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर (टीआई) स्तर के अधिकारियों की तैनाती होगी, जो मौके पर ही ट्रैफिक से जुड़े निर्णय ले सकेंगे. साथ ही यहीं से सर्किल ड्यूटी और चालान की प्रक्रिया भी संचालित की जाएगी, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी.
योजना में क्या-क्या शामिल
योजना के अनुसार, देहरादून में चार, ऋषिकेश में एक और विकासनगर में एक ट्रैफिक स्टेशन (सर्किल ऑफिस) बनाया जाएगा. इसके लिए चिन्हित स्थानों पर नए निर्माण और मौजूदा ढांचे के सौंदर्यीकरण की तैयारी चल रही है.
वर्तमान में ट्रैफिक संचालन शहर के केंद्रीय ट्रैफिक कार्यालय से होता है, जिसके कारण जाम वाले स्थानों तक पहुंचने में समय लग जाता है। आने वाले समय में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के पूरी तरह चालू होने के बाद ट्रैफिक का दबाव और बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह नई योजना लागू की जा रही है।
लिया जाएगा सख्त एक्शन
इसके अलावा, सड़कों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए टो-क्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है. अभी जहां केवल नौ क्रेन हैं, वहीं जल्द ही इन्हें बढ़ाकर 20 किया जाएगां लक्ष्य है कि प्रतिदिन कम से कम 200 वाहनों को हटाया जाए, जबकि फिलहाल यह संख्या करीब 20 तक ही सीमित हैं. ट्रैफिक स्टेशनों के आसपास ही जब्त वाहनों को रखने के लिए स्थान भी चिन्हित किए गए है.
हालांकि, संसाधनों के विस्तार के बीच सबसे बड़ी चुनौती पुलिस बल की कमी बनी हुई है. वर्तमान में ट्रैफिक पुलिस पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रही है। ऐसे में नए सर्किल ऑफिस और बढ़ी हुई क्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त बल जुटाना जरूरी होगा. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आंतरिक फेरबदल के जरिए व्यवस्था संभाली जाएगी और आगे स्टाफ बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.


