साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण 03 मार्च को लगने जा रहा है. यह ग्रहण शाम 6 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. बताया जा रहा है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जब ग्रहण भारत में दिखाई देता है, तो इसका प्रभाव यहां के लोगों पर अधिक माना जाता है. देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां और उपाय अपनाकर नेगिटिव प्रभाव को कम किया जा सकता है.
हिंदू धर्म में ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी विशेष माना जाता है. मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है, इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी जाती है. कुछ पवित्र वस्तुओं का उपयोग कर घर और परिवार की सुरक्षा तथा शुद्धता बनाए रखने की भी परंपरा है.
गंगाजल का छिड़काव
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़कना शुभ माना जाता है. इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मकता दूर होती है. विशेष रूप से पूजा स्थान, रसोई और मुख्य द्वार पर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है.
तुलसी का इस्तेमाल
ग्रहण के समय खाने-पीने की वस्तुओं को ढककर रखना चाहिए. यदि ऐसा संभव न हो तो उनमें तुलसी का पत्ता डालने की परंपरा है. तुलसी को पवित्र माना जाता है और मान्यता है कि इससे भोजन शुद्ध बना रहता है.
काले तिल का दान
ग्रहण समाप्त होने के बाद काले तिल का दान करना शुभ माना जाता है. जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को तिल दान करने से ग्रहण के अशुभ प्रभाव कम होने और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है. ज्योतिष में काले तिल को शनि से जुड़े दोषों को कम करने वाला माना गया है.
मंत्र जाप और कुश धारण
ग्रहण के समय कुश धारण कर भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है. इससे मन शांत रहता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इन उपायों को अपनाकर लोग ग्रहण के दौरान आध्यात्मिक संतुलन और सकारात्मकता बनाए रखने का प्रयास करते हैं.


