यश स्टारर और गीतू मोहनदास की फिल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ रिलीज के बाद से लगातार चर्चा में है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार शुरुआत की है, हालांकि इसे दर्शकों और क्रिटिक्स से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिल रहा है। रिलीज से पहले ही फिल्म विवादों में आ गई थी। फिल्म से जुड़े कथित आपत्तिजनक, झूठे और मानहानिकारक ऑनलाइन कंटेंट को लेकर मामला बेंगलुरु की सिविल कोर्ट तक पहुंचा था।
रिलीज से पहले कोर्ट ने दिया था अंतरिम आदेश
22 अगस्त को, फिल्म की रिलीज से कुछ दिन पहले, कोर्ट ने एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करते हुए ऐसे कंटेंट के प्रकाशन और प्रसार पर रोक लगाई थी, जिसे फिल्म के खिलाफ झूठा, दुर्भावनापूर्ण, मानहानिकारक या अपमानजनक बताया गया था।
अब फिल्म की रिलीज और 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ओपनिंग के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि मेकर्स ने फिल्म को लेकर नेगेटिव कंटेंट बनाने वाले कुछ क्रिएटर्स को लीगल नोटिस भेजे हैं।
यूट्यूबर सूरज कुमार ने शेयर किया नोटिस
इसी बीच यूट्यूबर सूरज कुमार से जुड़ा एक लीगल नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे फिल्म के रिव्यू से जोड़कर देखा जा रहा है। वायरल स्क्रीनशॉट में दावा किया गया है कि नोटिस उनके क्लाइंट KVN Monster Mind Creations LLP की ओर से जारी किया गया है, जिसे ‘Toxic’ के मेकर्स और फिल्म का कॉपीराइट ओनर बताया गया है।
सूरज कुमार ने भी X पर नोटिस का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “Thank You Team Toxic मेरे रिव्यू पर लीगल नोटिस भेजने के लिए.”
वायरल नोटिस में आगे आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने ऑनलाइन मीडिया के जरिए कुछ कंटेंट पब्लिश, शेयर, पोस्ट या सर्कुलेट किया है। नोटिस में ऐसे कंटेंट से जुड़े URL का भी जिक्र होने की बात कही गई है।
एक और यूजर ने भी किया ऐसा दावा
प्रशांत नाम के एक यूजर ने भी सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें ‘Toxic’ के रिव्यू को लेकर यश और KVN Productions की ओर से लीगल नोटिस मिला है। हालांकि, इन सोशल मीडिया दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
क्या फिल्म के नेगेटिव रिव्यू पर लगी है रोक?
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि कोर्ट का आदेश फिल्म की हर तरह की आलोचना या रिव्यू पर blanket ban नहीं लगाता। आदेश में कथित तौर पर ऐसे कंटेंट को रोकने की बात कही गई है, जिसे झूठा, दुर्भावनापूर्ण, मानहानिकारक या अपमानजनक माना गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि दर्शक या क्रिटिक्स फिल्म को पसंद या नापसंद नहीं कर सकते। फिल्म की कहानी, एक्टिंग, डायरेक्शन या एक्शन को लेकर genuine opinion या criticism को सिर्फ इसलिए मानहानिकारक नहीं माना जा सकता क्योंकि वह फिल्म के खिलाफ है।
कोर्ट ने क्यों दिया था अंतरिम आदेश?
यह अंतरिम आदेश KVN Productions LLP की ओर से दायर मुकदमे पर एडिशनल सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट ने दिया था। मामले में कई प्रतिवादी शामिल हैं, जिनमें X Corp. भी शामिल है। इसके अलावा John Doe नाम से एक पक्ष रखा गया है, जिसका इस्तेमाल उन अज्ञात लोगों के लिए किया गया है, जिनकी पहचान सामने नहीं है लेकिन कथित तौर पर फिल्म से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट ऑनलाइन फैला सकते हैं।
कोर्ट ने शुरुआती स्तर पर प्रोडक्शन हाउस की ओर से पेश दस्तावेजों को देखते हुए माना कि उनके पक्ष में prima facie case बनता है। कोर्ट के मुताबिक, अगर अस्थायी रोक नहीं लगाई गई तो मुकदमे के उद्देश्य पर असर पड़ सकता है और आगे कई कानूनी प्रक्रियाएं शुरू होने की स्थिति बन सकती है।
रोक अगली सुनवाई तक लागू
कोर्ट ने सीमित अवधि के लिए ex-parte temporary injunction देते हुए ‘Toxic’ से जुड़े ऐसे कंटेंट को communicate, publish, circulate, share, post, stream या किसी भी तरह उपलब्ध कराने से रोकने का निर्देश दिया, जिसे आदेश के दायरे में false, malicious, defamatory या derogatory माना गया हो।
यह रोक फिल्म की रिलीज से पहले और रिलीज के बाद दोनों समय के संबंधित कंटेंट पर लागू बताई गई है। हालांकि, यह स्थायी आदेश नहीं है। फिलहाल अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक लागू रहेगी और मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय है।
कुल मिलाकर, मामले का अहम पहलू यह है कि कोर्ट का आदेश फिल्म की सामान्य आलोचना पर रोक नहीं लगाता। कार्रवाई का दायरा कथित तौर पर झूठे, दुर्भावनापूर्ण या मानहानिकारक कंटेंट तक सीमित है। सोशल मीडिया पर लीगल नोटिस को लेकर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि होने तक उन्हें दावे के रूप में ही देखना उचित होगा।


