उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाएं अब रोजगार के लिए गांव से बाहर जाने के बजाय अपने ही गांव में स्वरोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल और ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं. कई महिलाएं न सिर्फ खुद रोजगार कर रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी काम के अवसर पैदा कर रही हैं.
कलावती देवी ने सिलाई से शुरू किया सफर
पौड़ी विकासखंड के खांड्यूंसैंण निवासी कलावती देवी मां भगवती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं. उन्हें हिमोत्थान सोसाइटी से 20 हजार रुपये का अनुदान मिला, जिससे उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी. इसके बाद उन्होंने आरसेटी के माध्यम से 13 दिनों का जूट बैग निर्माण प्रशिक्षण भी लिया.
सिलाई के साथ ब्यूटी पार्लर से बढ़ी आय
वर्तमान में कलावती देवी सिलाई के साथ-साथ ब्यूटी पार्लर का काम भी कर रही हैं. उनके स्वरोजगार से एक अन्य महिला को भी रोजगार मिला है. कलावती अब आगे जूट बैग निर्माण का काम शुरू करने की तैयारी कर रही हैं, जिसमें स्वयं सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा.
हर महीने करीब 15 हजार रुपये की आय
कलावती देवी के अनुसार, उन्हें वर्तमान में हर महीने करीब 15 हजार रुपये की आय हो रही है. इसमें लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत हो जाती है. स्वरोजगार शुरू करने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है.
पहाड़ी उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बनीं रामेश्वरी
पौड़ी मुख्यालय के पास गगाड़स्यूं क्षेत्र के ग्राम गहड़ निवासी रामेश्वरी देवी भी स्वरोजगार की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं. वह डांडा नागराजा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और पुलिस लाइन के समीप एक ग्राम दुकान चला रही हैं.
दुकान में मिल रहे हैं स्थानीय पहाड़ी उत्पाद
रामेश्वरी देवी की दुकान में मंडुवा, झंगोरा, पहाड़ी दाल, जैम, अचार, बद्री गाय का घी और स्थानीय सब्जियों समेत कई पहाड़ी उत्पाद बेचे जा रहे हैं. इससे उन्हें हर महीने करीब 6 से 7 हजार रुपये की शुद्ध आय हो रही है.
तीन लाख के ऋण से शुरू किया अपना कारोबार
रामेश्वरी देवी ने वर्ष 2025 में एनआरएलएम, नाबार्ड और हिमोत्थान सोसाइटी के सहयोग से तीन लाख रुपये का सीसीएल ऋण लिया था. इसके बाद उन्होंने अपनी ग्राम दुकान शुरू की. इस पहल से जहां उन्हें स्थायी आय का साधन मिला, वहीं स्थानीय उत्पादों को भी बाजार तक पहुंचने का मौका मिल रहा है.
कई महिलाएं बन चुकी हैं लखपति दीदी
ब्लॉक मिशन मैनेजर विजय बिष्ट के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण, ऋण और अन्य जरूरी सहयोग दिया जा रहा है. इससे जनपद में कई महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं और कुछ लखपति दीदी के रूप में भी आगे बढ़ चुकी हैं.
गांव में रहकर तैयार कर रहीं रोजगार के अवसर
स्वरोजगार से जुड़ी ये महिलाएं अब केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं कर रहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं. पौड़ी की कलावती और रामेश्वरी जैसी महिलाएं दिखा रही हैं कि सही प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो पहाड़ में रहकर भी मजबूत आजीविका और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं.


