तमिलनाडु विधानसभा में शुक्रवार को कावेरी जल विवाद और मेकेदातु डैम मुद्दे पर मुख्यमंत्री विजय और विपक्ष के नेता उधयनिधि स्टालिन के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि राज्य के हितों की रक्षा के लिए यदि कर्नाटक से बातचीत करनी पड़े और इसके लिए उन्हें अपमान भी सहना पड़े, तो वह इसके लिए तैयार हैं। वहीं उन्होंने साफ कहा कि वह इस मुद्दे पर “सस्ती राजनीति” नहीं करना चाहते।
ऑल पार्टी मीटिंग की मांग ठुकराई
उधयनिधि स्टालिन ने कर्नाटक की तर्ज पर तमिलनाडु में भी सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि मेकेदातु डैम मुद्दे पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है और राज्य सरकार कावेरी के जल अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी।
PM मोदी को भेजा गया था पत्र
मुख्यमंत्री विजय ने बताया कि राज्य सरकार पहले ही मेकेदातु परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित कर चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए परियोजना को मंजूरी न देने का आग्रह किया गया था।
‘अपमान भी सहना पड़े तो तैयार हूं’
विजय ने कहा कि कर्नाटक से सीधे संवाद की पहल का मतलब यह नहीं है कि तमिलनाडु अपने कानूनी अधिकारों से पीछे हट रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत से राज्य के लोगों का हित होता है तो वह इसके लिए किसी भी तरह का अपमान सहने को तैयार हैं।
उधयनिधि ने उठाए कई सवाल
उधयनिधि स्टालिन ने पूछा कि जब कर्नाटक सरकार सर्वदलीय बैठक कर सकती है, तो तमिलनाडु सरकार क्यों नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कर्नाटक दौरे और सरकार द्वारा घोषित विशेष पैकेज को लेकर भी सवाल उठाए तथा किसानों के कर्ज माफ करने के चुनावी वादे पर सरकार से जवाब मांगा।


