दिल्ली में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन के बाद सुरक्षा व्यवस्था और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने कहा कि जहां बैरिकेडिंग की बिल्कुल जरूरत नहीं है, वहां से इसे हटाया जाए. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों तक लोगों की आवाजाही में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए.
विशेष सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आसपास लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत लगी पाबंदियां हटाने का निर्देश दिया. यह धारा एक स्थान पर लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध लगाने के लिए इस्तेमाल की जाती है.
‘लोगों की आवाजाही सामान्य की जाए’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों तक पहुंचने और वहां से बाहर निकलने के रास्ते में किसी तरह की आशंका या बाधा नहीं होनी चाहिए. पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों तक आने-जाने की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंध हटाए जाएं.
अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत होने पर उचित नियमन किया जा सकता है, लेकिन लोगों की स्वतंत्र आवाजाही को सामान्य किया जाना चाहिए.
‘प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून के दायरे में’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल पुलिस कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए.
पीठ ने कहा, “आपको विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है, इसमें कोई विवाद नहीं है. लेकिन प्रदर्शन करने का तरीका पुलिस कानून के दायरे में होना चाहिए.”
जस्टिस बागची ने याचिकाकर्ता से कहा कि प्रदर्शन के अधिकार को पुलिस कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता.
दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद करने का मामला भी उठा
यह सुनवाई वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर हुई. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का हवाला दिया गया था. उस आदेश में सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई थी.
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था. प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और कई स्थानों पर लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए थे.
दिल्ली पुलिस, गृह सचिव और DMRC को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने और उससे जुड़ी परिस्थितियों को लेकर दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है.
पीठ ने अधिकारियों को मंगलवार तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब इस रिपोर्ट से हिरासत की कार्रवाई, मेट्रो सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.


